-जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा एम्स, नई दिल्ली सहित अन्य सहयोगियों के साथ किए गए एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लंबे समय तक इनहेलर का इस्तेमाल करने वाले अस्थमा रोगियों में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद दोबारा ऑपरेशन का खतरा बढ़ सकता है। जॉन्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली सहित अन्य सहयोगियों के साथ किए गए एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से स्टेरॉयड आधारित इनहेलर का उपयोग करने वाले रोगियों में स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी के बाद दोबारा सर्जरी की आवश्यकता होने की संभावना, इनहेलर का उपयोग न करने वालों की तुलना में तीन गुना से अधिक थी।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अस्थमा खुद इस जोखिम को नहीं बढ़ाता है, बल्कि लंबे समय तक स्टेरॉयड-आधारित इनहेलर का उपयोग सर्जरी के परिणामों को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक प्रतीत होता है। जिन रोगियों ने इन दवाओं का उपयोग नहीं किया, उनके परिणाम अस्थमा न होने वाले मरीजों के समान पाए गए। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि जहां लंबे समय तक मौखिक स्टेरॉयड के प्रभावों के बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध है, वहीं स्पाइनल सर्जरी के परिणामों पर इनहेलर स्टेरॉयड के प्रभाव को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी। डॉक्टरों के अनुसार, स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी हड्डियों के सही तरीके से जुड़ने पर निर्भर करती है और लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग हड्डियों को कमजोर कर सकता है। साथ ही, उपचार प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जिससे जटिलताओं और दोबारा सर्जरी की संभावना बढ़ जाती है।
एम्स नई दिल्ली में ओर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर और अध्ययन से जुड़े डॉ. भावुक गर्ग के अनुसार, लंबे समय से सुरक्षित माने जाने वाले इनहेल्ड स्टेरॉयड भी हड्डियों के स्वास्थ्य और स्पाइनल फ्यूजन के परिणामों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत जैसे देश में जहां अस्थमा और ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान पर्याप्त रूप से नहीं हो पाती, वहां सर्जरी से पहले सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और उपचार को बेहतर बनाना बेहद आवश्यक है। यह अस्थमा का इलाज बंद करने के बारे में नहीं है, बल्कि रीढ़ की बेहतर देखभाल के बारे में है। जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर सर्जरी से पहले हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना जरूरी है। गर्ग ने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए ये निष्कर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि इनहेलर का उपयोग करने वाले मरीजों में हड्डियों के खराब फ्यूजन और इम्प्लांट से जुड़ी समस्याएं अधिक देखी गई, जो हड्डियों की संभावित कमजोरी की ओर संकेत करती हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि ये निष्कर्ष केवल एक संबंध दर्शाते हैं, न कि प्रत्यक्ष कारण।