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भूले-बिसरे राष्ट्रनिर्माताओं को पहचान दिलाएगी विधानसभा : विजेंद्र गुप्ता

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45 कम परिचित राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन और योगदान के तैयार हो रहे दस्तावेज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा भूले-बिसरे राष्ट्रनिर्माताओं के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी, जिनका इतिहास में अपेक्षित उल्लेख नहीं हो सका। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि विधानसभा ऐसे करीब 45 अपेक्षाकृत अल्प-परिचित राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन और योगदान के दस्तावेज तैयार कर रही है।
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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित समारोह में मुख्य वक्ता रहे अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की ऐतिहासिक चेतना तभी मजबूत होती है, जब वह प्रसिद्ध नायकों के साथ उन व्यक्तित्वों को भी सम्मान दे, जिनका योगदान समय के साथ जनस्मृति से धुंधला पड़ गया है। ऐसे राष्ट्रनिर्माताओं को उनका उचित स्थान दिलाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सिद्धांतों और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने वाला दूरदर्शी नेता बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर उनका रुख भारत की एकता और संवैधानिक अखंडता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक था। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने लद्दाख दौरे का उल्लेख करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की देशभक्ति की सराहना की। उन्होंने डॉ. आशुतोष मुखर्जी की बौद्धिक विरासत का भी जिक्र किया और उनकी पुस्तक बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी के संकलित भाषण को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संग्रह में शामिल करने का आग्रह किया।
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