दिल्ली विधानसभा की याचिका समिति ने उपराज्यपाल को एक बार फिर आड़े हाथ लिया है। समिति ने आरटीआई के हवाले से कहा है कि दिल्ली विधानसभा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मामले दर्ज कराने के लिए आईएएस अधिकारियों को अनुमति उपराज्यपाल कार्यालय से दी गई थी। इतना ही नहीं, आईएसएस अधिकारियों को स्वयं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने के लिए कानूनी लड़ाई के लिए उपराज्यपाल की सहमति से वकीलों की फीस के सरकारी खजाने से खर्च की गई।
याचिका समिति के चेयरपर्सन सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पिछले साल जून-जुलाई के दौरान समिति ने तीनों एमसीडी और पीडब्ल्यूडी के तहत आने वाले छोटे-बड़े सौ से अधिक नालों का जायजा लिया। निरीक्षण में समिति सदस्यों के साथ पीडब्ल्यूडी और तीनों एमसीडी के शीर्ष अधिकारी भी शामिल थे। उस दौरान जिन नालियों को 100 फीसदी डीसिल्टेड करने का दावा किया गया था, उन्हें गंदगी और कचरे से युक्त पाया गया था। भारद्वाज ने गंदगी वाले नालों की तस्वीरें भी दिखाईं।
उन्होंने कहा कि नालों का निरीक्षण करने के बाद एमसीडी व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने जो रिपोर्ट बनाई, वह हकीकत से दूर थी। समिति ने इस तरह के भ्रष्टाचार करने वाले स्थानीय निकायों व उनके अधिकारियों की जांच एसीबी से कराने की सिफारिश की थी। एसीबी के मुखिया दिल्ली के उपराज्यपाल ने समिति की सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया।
समिति ने तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव अश्विनी कुमार के खिलाफ कार्रवाई की भी सिफारिश की थी, लेकिन उपराज्यपाल ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस अधिकारी को केंद्र सरकार ने पुड्डुचेरी के मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत करके पुरस्कृत किया। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल अधिकारियों के भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।