हरियाणा व महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम का सीधा ताल्लुक बेशक दिल्ली से न हो, फिर भी दोनों प्रदेशों में भाजपा के प्रदर्शन ने सियासी हलके में खलबली मचाई है। खास तौर से हरियाणा के परिणाम को दिल्ली के लिए अहम माना जा रहा है। अभी तक चुनावों की मांग कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के नेता रविवार को नतीजों के सियासी मायने निकालते रहे।
दोनों राज्यों के नतीजों से ‘आप’ के भीतर सरकार बनाने की वकालत करने वाला धड़ा दोबारा मजबूत हुआ है। दोनों राज्यों में भाजपा की जीत की वजह मोदी लहर बताते हुए इस गुट के नेता सरकार बनाने की दलील दे रहे हैं। खासतौर पर इसलिए कि भाजपा ने दोनों राज्यों में पहली बार अपने दम पर चुनाव लड़ा था।
नाम उजागर न करने की शर्त पर एक विधायक ने बताया कि अगर हरियाणा में भाजपा जीत सकती है तो उसे दिल्ली में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। ऐसी हालत में सरकार बनाने की कोशिश करना बेहतर होगा।
हालांकि पार्टी इससे साफ इनकार कर रही है। ‘आप’ का कहना है कि अगर भाजपा मोदी लहर पर सवार है तो दिल्ली में चुनाव कराने से क्यों भाग रही है।
‘आप’ प्रवक्ता दिलीप पांडे के मुताबिक, कांग्रेस सरकार से परेशान हरियाणा के आम लोग विकल्प की तलाश कर रहे थे। लेकिन ‘आप’ की हरियाणा इकाई ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। ऐसे में ‘आप’ समर्थक मंशा होने के बाद भी भाजपा के खिलाफ वोट नहीं कर सके।
यही हालत महाराष्ट्र का भी रहा। लेकिन वहां भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने को मजबूर है। पांडेय का सवाल था कि अगर मोदी का जादू काम कर रहा है तो भाजपा दिल्ली में चुनाव कराने से क्यों भाग रही है।