नेताजी इस समय धूल-मिट्टी फांकते हुए लोगों के दर पर पहुंच रहे हैं। कोई कह रहा है कि 60 माह के लिए अपने वोटों का कर्ज दे दो, उसे ब्याज सहित उतार दूंगा तो कोई एक बार फिर वोट का कर्ज मंजूर करने के लिए गुहार लगा रहा है।
दिलचस्प यह है कि अधिकांश नेता वोटों के साथ-साथ नोटों के भी कर्जदार हैं। उन पर लक्ष्मी चाहे जितनी मेहरबान हो, लेकिन उन्होंने बैंकों या अन्य संस्थाओं से किसी न किसी काम के लिए कर्ज ले रखा है।
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महेंद्र प्रताप सिंह पांच बार विधायक रह चुके हैं। इसलिए वह कह रहे हैं कि एक बार और मौका दे दो, उसके बदले पहले से ज्यादा ब्याज मिलेगा। यही हाल विधायक आनंद कौशिक और शिवचरण लाल शर्मा का है। यशवीर डागर, सीमा त्रिखा, विपुल गोयल, प्रवेश मेहता और गुलशन बग्गा जैसे उम्मीदवार जनता से कह रहे हैं कि एक बार मौका तो देकर देखो।
आप जो वोट दोगे, उसकी पाई-पाई चुका देंगे। हालांकि यह बात अलग है कि जनता को इन पर विश्वास करने से पहले यह भी ध्यान में रखना होगा कि इनमें से अधिकांश नेता अपनी पार्टी के भी नहीं हुए।
कौन कितना बड़ा कर्जदार
विपुल गोयल (भाजपा) 38 करोड़, शिवचरण लाल शर्मा (निर्दलीय) 4.5 लाख, यशवीर डागर (भाजपा) 48.75 लाख, राजेश नागर (भाजपा) 2.25 करोड़, मूलचंद शर्मा (भाजपा) 20 लाख रुपये, नागेंद्र भड़ाना (इनेलो) 8.10 लाख, महेंद्र प्रताप सिंह (कांग्रेस) 48.4 लाख, धर्मवीर भड़ाना (बसपा) 2.70 लाख, लखन सिंगला (कांग्रेस) 73 लाख, करण सिंह (कांग्रेस) 1.5 करोड़।
नोट: इन सभी नेताओं ने ये पैसा लोन लिया हुआ है।