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सीबीआई की टीम पर हमला करने वाला एएसआई गया जेल

Sat, 30 Mar 2019 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
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Dasna jail
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सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को रिश्वत कांड के मामले में दबिश देने गई सीबीआई की टीम पर हमला करने वाले सीबीआई के एएसआई ने सरेंडर किया। विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत ने अंतरिम जमानत की अर्जी खारिज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया। सीबीआई की टीम इस मामले में तहसीलदार और सीबीआई इंस्पेक्टर को 22 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर चुकी है।
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कोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक जून 2018 में ग्रेटर नोएडा के कसाना थाने में दर्ज यमुना एक्सप्रेस-वे की जमीन के मामले में 126 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। इस मामले में प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता समेत अन्य आरोपियों से समझौता कराने के लिए सीबीआई के इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह राठौर और तहसीलदार रणवीर सिंह पर साठगांठ करने का आरोप है। 

आरोप है कि उन्होंने इसके लिए 22 लाख रुपये की डिमांड की थी। आरोपी नोएडा के सेक्टर-27 स्थित एक फ्लैट में रुपये लेकर पहुंचे थे। वह रुपये देकर निकल गए। इसके बाद सीबीआई की टीम ने तीन फरवरी को फोन ट्रिपिंग के बाद छापामारी की और तहसीलदार व इंस्पेक्टर को रिश्वत के 22 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। 
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सीबीआई ने दोनों आरोपियों का रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 48 घंटे का रिमांड मिली थी। इस मामले में इंस्पेक्टर राठौर के साथ मिलीभगत का आरोपी एएसआई संजय दत्त फरार चल रहा था। सीबीआई की टीम 24 फरवरी को ग्रेटर नोएडा स्थित उसके घर पर दबिश देने गई तो उन पर हमला कर दिया था। 

बंधक बनाकर किया था एएसआई समेत पांच ने हमला

जमीन घोटाले में नामजद आरोपी एएसआई को गिरफ्तार करने के लिए 24 जुलाई को सीबीआई की टीम ग्रेटर नोएडा के सुन पुरा गांव पहुंची थी। जहां, एएसआई सुनील दत्त, उसके भाई युद्धवीर सिंह, सुखवीर सिंह, योगेश, धर्मवीर और उसके भतीजे ध्यान वीर और चार अन्य पर डकैती, सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने आदि संगीन धाराओं में केस दर्ज किया था। इस मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने युद्धवीर को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों ने सीबीआई अधिकारियों के मोबाइल, डायरी, पहचान पत्र और सरकारी नोटिस की प्रति छीनकर जला दी थी। मारपीट में महिला कांस्टेबल समेत चार लोगों को चोट लगी थी। 

यह है मामला
मामला यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से जुड़ा है। 2014 में हुई कथित जमीन घोटाले में 126 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता सहित कुछ कर्मियों ने निजी कंपनियों के साथ मिलकर मथुरा के सात गांवों 2014 में करीब 57 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन खरीदी थी और इसके एवज में प्राधिकरण से इसके मालिकों को मुआवजा दिलाया गया। लेकिन यह रकम तय मुआवजे से कहीं ज्यादा थी। पांच साल पुराने इस मामले में 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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