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केजरीवाल की अगुवाई में ही आप लड़ेगी लोक सभा चुनाव, पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने लिया फैसला

Sun, 30 Dec 2018 02:39 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में संबोधित करते केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी आगामी लोकसभा व दिल्ली विधानसभा चुनाव अपने संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में लड़ेगी। आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में शनिवार को परिषद का कार्यकाल एक साल बढ़ाने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया। परिषद का कार्यकाल बढ़ने से राष्ट्रीय कार्यकारिणी व राष्ट्रीय संयोजक के पद का चुनाव एक साल तक कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, अस्थायी व्यवस्था के लिए पार्टी के संविधान की बदलाव की जरूरत नहीं पड़ी।

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आप के वरिष्ठ नेता व पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता के मुताबिक, राष्ट्रीय परिषद के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पारित हो गया है। इससे आंतरिक चुनाव कराने की जगह पार्टी लोकसभा चुनाव के प्रचार अभियान पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगी। वहीं आप अब अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में लोक सभा चुनाव-2019 व दिल्ली विधान सभा चुनाव-2020 लड़ेगी। 

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल पार्टी के दूसरी बार 23 अप्रैल 2016 को आप के दूसरी बार संयोजक बने थे। अप्रैल 2019 में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा था। आप के संविधान के अनुसार, कोई भी सदस्य दो कार्यकाल से ज्यादा संयोजक नहीं रह सकता है। पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है कि तकनीकी तौर पर केजरीवाल को अप्रैल तक अपना पद छोड़ देना होता। लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव भी हैं। ऐसे में पार्टी चुनावी अभियान से हटकर आप का आंतरिक चुनाव कराने में व्यस्त होना नहीं चाहती थी। ऐसी हालत में परिषद की बैठक में एक साल कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया गया। परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित भी कर दिया।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भी बढ़ा था परिषद का कार्यकाल
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि दिल्ली विधान सभा चुनाव से पहले 2015 में भी एक बार परिषद का कार्यकाल एक साल के लिये बढ़ाया गया था। दरअसल, पार्टी के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय परिषद आप की नीति नियामक संस्था है। परिषद ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव करती है। जबकि कार्यकारिणी संयोजक समेत पार्टी की राजनीतिक मामलों के सदस्यों का चयन करती है। ऐसे में परिषद का कार्यकाल बढ़ने से स्वाभाविक तौर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी समेत संयोजक का कार्यकाल बढ़ गया है। 

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