फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहली बार खुले केजरीवाल की जिंदगी के कई अहम राज

विज्ञापन
विज्ञापन
भाई-बहनों में सबसे बड़े अरविंद केजरीवाल की छोटी बहन रंजना अपनी आठवीं की परीक्षा से पहले बहुत बीमार पड़ गई थी। उस वक्त अरविंद ने रातभर जगकर उसे उसके लेसन्स याद करवाए। यही वो वक्त था जब दिल्ली के सीएम केजरीवाल को पहली बार अपनी जिम्मेदारियों का अहसास हुआ।
विज्ञापन


उस रात के बाद रंजना अगले दिन उठी और अपनी परीक्षा देकर आई। आज रंजना एक डॉक्टर है। केजरीवाल कहते हैं कि वो अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं लेकिन किसी ने भी उन्हें उनकी जिम्मेदारी का एहसास नहीं दिलाया।

उन्हें खुद भी नहीं पता कि दायित्वों का ये भाव कब उनके अंदर घर कर गया। ये बातें केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के मुख पत्र 'आप की क्रांति' के ताजा संस्करण में छपे उनके एक इंटरव्यू में कही है।
विज्ञापन


महीने दो बार छपने वाले आम आदमी पार्टी के मुखपत्र में दिए अपने इंटरव्यू में केजरीवाल ने अपनी जिंदगी के कुछ बहुत खास-खास लम्हों का जिक्र किया है। आईएएस की नौकरी छोड़ने से लेकर मदर टेरेसा के साथ काम करने और भ्रष्टाचार से लड़ने की शुरूआत कैसे की जैसी घटनाओं का जिक्र केजरीवाल ने अपने इस इंटरव्यू में किया है।

क्यों छोड़ी ‌इंजीनिय‌रिंग की नौकरी

16 अगस्त 1968 में हरियाणा के सिवानी में जन्मे केजरीवाल ने अपनी पढ़ाई ‌हरियाणा और उत्तरप्रदेश के अलग-अलग स्कूलों से की। अरविंद बताते हैं क‌ि उन्हें पढ़ना बहुत ज्यादा पसंद था। और इस प्यार में उन्हें पता ही नहीं चला कि कब इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी परीक्षा आईआईटीजी उनका सपना बन गया।

आईआईटी-खड़कपुर से मै‌केनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद केजरीवाल ने जमशेदपुर में टाटा ग्रुप ज्वाइन कर लिया। वहां 10 से 5 की नौकरी उनके मन को नहीं भाई और उन्हें लगने लगा कि वो ऐसी किसी नौकरी के लिए नहीं बने हैं।

उन्होंने सिविल सर्विसेज की मेन्स परीक्षा दी और बिना इंटरव्यू का इंतजार किए इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद केजरीवाल रामकृष्ण मिशन और नेहरू युवा केंद्र से जुड़े रहे। इस दौरान उनके माता-पिता उनके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित रहते थे।

मदर टेरेसा के बहुत बड़े फैन हैं केजरीवाल

केजरीवाल जो कल ही बेंगलूरू से अपनी खांसी और शुगर का इलाज कराकर लौटे हैं उन्होंने इस इंटरव्यू में बताया है कि अपना सिविल ‌सर्विसेज की मेन्स परीक्षा देने के तुरंत बाद ही वो कोलकाता मदर टेरेसा से मिलने चले गए थे।

उन्होंने कहा कि वह मदर टेरेसा के बहुत बड़े फैन रहे हैं। अरविंद ने मदर को बताया कि वो उनके साथ काम करना चाहते हैं। तब मदर ने उनका थामा और कहा कि कालीघाट जाकर काम करो। केजरीवाल ने मदर टेरेसा के साथ दो महीने तक काम किया।

उस दौरान की यादों में जाते हुए अरविंद ने बताया कि कोलकाता की सड़कों, फुटपाथ और गलियों, कॉलोनियों में गरीबों को देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि सच्ची सेवा क्या है। ये दो महीने केजरीवाल के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण महीने थे जिसने उन्हें पूरी तरह बदल दिया।

कैसे हुआ अरविंद और सुनीता का प्यार

अपने प्यार के बारे में बताते हुए केजरीवाल काफी भावुक हो जाते हैं। आम आदमी पार्टी की दोबारा जीत के बाद अपनी पत्नी सुनीता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताने वाले केजरीवाल सुनीता से प्यार होने को अपने जीवन की सबसे सुखद घटना करार देते हैं।

1995 में जब नागपुर में अरविंद सिविल सर्विसेज की ट्रेनिंग ले रहे थे तो उन्हीं के बैच में ट्रेनिंग ले रही सुनीता से उन्हें प्यार हो गया। केजरीवाल ने उन्हें प्रपोज किया और सुनीता ने हां कह दी। दोनों ने बाद में शादी कर ली और फिर दोनों की ही पोस्टिंग इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दिल्ली में हो गई।
विज्ञापन

ऐसे शुरू हुई भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई

जब केजरीवाल ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में काम करना शुरू किया तब उन्हें एहसास हुआ कि यहां भ्रष्टाचार ने कितनी गहराई तक अपनी पैठ बनाई हुई है। फिर उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे लोगों से मिलना जुलना शुरू किया। तब वर्ष 2000 में उन्होंने अपने ऑफिस के बाहर के दोस्तों के साथ मिलकर परिवर्तन नामक एनजीओ शुरू किया।

केजरीवाल कहते हैं कि उनके भाई और चाचा ने 50000 हजार रुपए का सहयोग दिया। उन्होंने इन पैसों की मदद से लोगों में अपने नंबर और ईमेल आईडी के साथ पैम्फलेट और बैनर बांटे। इन बैनरों के माध्यम से उन्होंने लोगों से अपील की कि वो इनकमटैक्स के अधिकारियों को घूस न दें।

उन्होंने ये सारे काम अध्ययन के लिए मिले दो साल के अवकाश के दौरान किया। वहीं अगले दो साल उन्होंने बिना वेतन की छुट्टी लेकर भी ये सारे काम किए। उनके एनजीओ परिवर्तन ने 18 महीनों में लगभग 800 केस सुलझाए। इसके साथ ही उन्होंने कई ज‌नहित याचिकाएं भी डालीं।

इनके एनजीओ के विरोध के बाद ही तत्कालीन केंद्र सरकार ने आरटीआई एक्ट लागू किया। लेकिन उन्हें लगा कि भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर केवल एक एनजीओ के माध्यम से लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। इसीलिए वो 2011 में अन्ना आंदोलन में कूद पड़े। और उसके बाद क्या हुआ ये तो सभी जानते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें