दिल्ली विधानसभा में आयोजित सिल्वर जुबली कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की आवाज बुलंद की। केजरीवाल के मुताबिक, इसके बाद ही दिल्ली सरकार प्रभावी ढंग से आम लोगों के लिए काम कर सकेगी।
केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि अगले पांच साल में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत विधायक व पूर्व विधायक मौजूद थे। हालांकि, कार्यक्रम का कांग्रेस व भाजपा ने औपचारिक तौर पर विरोध किया था।
केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में जनता मालिक है, लेकिन दिल्लीवालों को इससे महरूम रखा गया। 25 साल से सरकार चुनी गई, लेकिन आधी शक्तियों के साथ। केजरीवाल ने सवाल किया कि दिल्ली के लोगों के वोट की कीमत एक रुपये में 10 पैसे क्यों है, जबकि वे सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की जमीन किस चीज के लिए इस्तेमाल हो, इसे दिल्ली की जनता को तय करना था। कल डीडीए की बैठक थी। स्कूल के लिए 4000 स्क्वायर मीटर जगह की जरूरत थी, लेकिन डीडीए ने 1600 स्क्वायर फिट कर दी।
विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को कार्यक्रम के लिए बुलावा भेजा गया था, लेकिन उन्होंने निजी निजी कारणों से समारोह में आने से मना कर दिया। इससे निमंत्रण पत्र में बदलाव करना पड़ा। गोयल के मुताबिक, कार्यक्रम का बहिष्कार करके कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन व नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन का ही नहीं, बल्कि दिल्ली की जनता का अपमान किया है।
विपक्षी पार्टी के नेताओं ने सदन की गरिमा भी नहीं रखी। इस दौरान गोयल ने दिल्ली विधानसभा के इतिहास पर विस्तार से जानकारी दी। गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा की पहली बैठक 14 दिसंबर 1993 को हुई थी। शुक्रवार को इसके 25 साल पूरे हो गए। इसी उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।