10 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ईडी पर्याप्त सामग्री, अनुमोदकों और आप के अपने उम्मीदवार के बयान पेश करने में सक्षम था, जिसमें कहा गया था कि केजरीवाल को गोवा चुनाव के लिए पैसे दिए गए थे।
केजरीवाल ने ईडी द्वारा उन्हें जारी किए गए नौ समन को नजरअंदाज कर दिया था। इस मामले में आप नेता मनीष सिसौदिया और संजय सिंह भी आरोपी हैं। जबकि सिसौदिया अभी भी जेल में हैं, सिंह को हाल ही में ईडी द्वारा दी गई रियायत के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी।
ईडी ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली उत्पाद शुल्क घोटाले के किंगपिन हैं और 100 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय के उपयोग में सीधे तौर पर शामिल हैं।
केंद्रीय एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि थोक विक्रेताओं को असाधारण लाभ मार्जिन देने के लिए विजय नायर और साउथ ग्रुप के साथ अन्य व्यक्तियों द्वारा एक साजिश रची गई थी।
केजरीवाल को अंतरिम जमातन की मांग करने वाले को फटकार
बीते सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति व अन्य मामलों में मुख्यमंत्री केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने की मांग करने वाले कानून के छात्र के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने उनसे पूछा आपको यह वीटो शक्ति कहां से मिलती है? क्या आप संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं? यदि तुमने निर्णय ही कर लिया है तो यहां क्यों आये हो? केजरीवाल को आपकी सहायता या आपके निर्णय की आवश्यकता नहीं है। वहीं केजरीवाल ने भी याचिका पर आपत्ति जताते हुए इससे कानून का दुरुपयोग बताते हुए याचिकाकर्ता की सहायता लेने से इनकार कर दिया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत यह है कि पीड़ित पक्ष को अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। पीठ ने कहा कि निस्संदेह जनहित याचिकाओं में लोकस स्टैंडी की भूमिका में छूट दी गई है, हालांकि यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि गरीबों या सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े या विकलांग व्यक्तियों को उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए। इसमें कहा गया कि केजरीवाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनके पास अदालत का दरवाजा खटखटाने के साधन हैं, जो वास्तव में उन्होंने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के समक्ष किया है। पीठ ने कहा नतीजतन इस अदालत का मानना है कि अधिकार क्षेत्र के सिद्धांत में किसी ढील की जरूरत नहीं है।