अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह मिन्नत करते हैं कि उन्हें उतना अधिकार मिल जाये, जितना शीला दीक्षित को मिला हुआ था। उपराज्यपाल उन्हीं मामलों में दखल करें, जहां किसी मसले पर केंद्र का हित प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर गुजारिश है कि वह अपने उपराज्यपाल को समझायें। दिल्ली सरकार से बड़ी लाइन खीचनें की कोशिश करें। नकारात्मक राजनीति करने से किसी को भला नहीं होगा।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने उपराज्यपाल को बताया था कि राशन में गड़बड़ हो रही है। तीन बार उनसे कहा कि फूड कमिश्नर को हटा दो। लेकिन उपराज्यपाल ने उनकी बात नहीं मानी।
अब जब सीएजी रिपोर्ट में इस घोटाले का जिक्र हुआ तो सबने माना। उन्होंने सदन की लोक लेखा समिति (पीएसी) से अपील की कि वह उपराज्यपाल व फूड कमिश्नर के बीस संबंधों की भी जांच करे। वहीं, उन्होंने उपराज्यपाल कार्यालय के आउटकम बजट को वार्षिक बजट का हिस्सा बनाने की भी मांग सदन से की।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने उपराज्यपाल से कहा था कि अगर दोनों मिलकर काम करें तो दिल्ली को कहां से कहां तक पहुंचा सकते हैं।
बकौल केजरीवाल, उपराज्यपाल से कहा था कि अगर किसी फाइल में ऊपर से कोई दबाव आ रहा है तो वह उसे बता दें। सरकार वह फाइल पुटअप नहीं करेगी। लेकिन उपराज्यपाल मानते ही नहीं।
वह न मुख्यमंत्री को कुछ समझते हैं और न ही मंत्री व विधायक को। वह तानाशाह हैं। उपराज्पाल ने अभी तक उन्हीं फाइलों को मंजूर की है, जिन पर मीडिया से दबाव पड़ता है। केजरीवाल ने कहा कि वह हेडमास्टर की तरह हर पन्ने को पलट रहे हैं।
विपक्ष ने किया वॉक आउट
नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधान सभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर कहा था कि सदन में उपराज्यपाल कार्यालय के खिलाफ विरूद्ध एकतरफा आउटकम रिपोर्ट पेश की गयी है।
वहीं, रिपोर्ट लाने का प्रस्ताव को भी नियमों का हवाला देते हुये भाजपा ने गैर वैधानिक बताया था। इस पर व्यवस्था देते विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि सदन के प्रस्ताव से नहीं, उपमुख्यमंत्री ने रिपोर्ट पेश की है।
ऐसे में सदन इस पर चर्चा कर सकता है। उन्होंने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया। इससे नाराज विपक्ष ने सदन का वॉक आउट कर दिया।