विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रेहड़ी-पटरी वालों को लाइसेंस देने की घोषणा को चुनावी स्टंट बताया है। उन्होंने कहा है कि सुविधा देने का वादा कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सारे मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
गुप्ता ने कहा कि चुनाव करीब देख आनन फानन में दिल्ली को वेंडिंग कमेटी एक्ट 2014 लागू करने वाला पहला राज्य बनाने की घोषणा कर डाली। लेकिन इस वादा को पूरा करने के लिए व्यावहारिक योजना नहीं है। पिछले 55 महीनों में सड़क पर सामान बेचकर अपने परिवार का जीवन यापन करने वालों को बसाने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को झाड़ नहीं लगाई होती तो सरकार की नींद नहीं खुलती। चुनाव नजदीक आते देख मुख्यमंत्री को गरीबों की याद आई। जल्दबाजी में उन्होंने एमसीडी को एक महीने में सर्वे पूरा करने का आदेश तक दे डाला जबकि त्योहारों के मौसम में यह काम कठिन है। सर्वे का काम पूरा नहीं होने पर मुख्यमंत्री इसकी जिम्मेदारी एमसीडी पर थोप देंगे। गरीब रेहड़ी पटरी वालों के लिये कोई ठोस योजना लेकर आए और धरातल पर काम करें।
प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार व भाजपा पर रेहड़ी-पटरी वालों का रोजगार छीनने का आरोप मढ़ा है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की पूर्व सरकार ने रेहड़ी पटरी संरक्षण अधिनियम के तहत आबादी के ढाई प्रतिशत रेहड़ी पटरी वालों के साथ टाऊन वेंडिंग कमेटी बनाकर उन्हें जगह आवंटित करने को कहा था। शुरू में तो इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब वेडिंग कमेटी बनी भी तो आम आदमी पार्टी के समर्थक वाले यूनियनों को टाऊन वेडिंग कमेटी में शामिल कर लिया गया।
यादव ने कहा कि 10 अक्तूबर को कांग्रेस पार्टी रेहड़ी वालों के समर्थन में दिल्ली सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगी। सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेगी। रेहड़ी-पटरी वालों का रोजगार छीना जा रहा है। सड़क से हटाकर उन्हें वैकल्पिक जगह नहीं मुहैया नहीं कराई जा रही है। सड़क पर रोजगार करने की सुविधा की जगह अंतरराष्ट्रीय मानक वाले खोखें देने की बात की जा रही है।
दिल्ली सरकार पहले उनका रोजगार सुनिश्चित करें फिर उन्हें सब्जबाग दिखाए। उन्होंने टाऊन वेंडिंग कमेटी को भंग कर फिर से सभी राजनीतिक पार्टी के समर्थकों के वेंडर से मशवरा लेकर गठित करने की मांग की है। यादव ने कहा कि एमसीडी तो पहले से ही भ्रष्टाचार में लिप्त है ऐसे में सर्वे की जिम्मेदारी सौंपना बेहद ही निराशाजनक है। चुनाव नजदीक आते देख गरीबों के नाम पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीति कर रहे है।