आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए संजीव चतुर्वेदी का मामला लिटमस टेस्ट साबित होगा। प्रधानमंत्री अगर ईमानदार अधिकारी को नहीं बचा सके तो आम लोगों के सामने उनकी कथनी और करनी का फर्क उजागर होगा।
केजरीवाल शुक्रवार को मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का इस्तीफा भी मांगा। उन्होंने कहा कि एम्स के सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को साजिशन हटाया गया है। इस मामले में हर्षवर्धन सीवीसी की अनुमति न मिलने की झूठी दलील दे रहे हैं।
केजरीवाल का आरोप था कि चतुर्वेदी ऐसे मामलों की जांच कर रहे थे, जिससे कई नेताओं का हित टकरा रहा है। इसमें से एक मामला केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की डॉक्टर एसी अमीनी से जुड़ा है।
जबकि दूसरे मामले में भाजपा महासचिव जेपी नड्डा का हित टकरा रहा है। केजरी के मुताबिक, नड्डा के करीबी आईएएस अधिकारी विनीत चौधरी के खिलाफ जितनी बार चतुर्वेदी ने जांच का शिकंजा कसा, नड्डा ने इन्हें हटाने की सिफारिशी चिट्ठी स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी।
केजरीवाल ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी साल मई में नई सरकार बनने के तीन दिन पहले चतुर्वेदी की नियुक्ति को सही बताते हुए मामला बंद करने की बात कही थी। लेकिन दो महीने बाद ही मंत्रालय ने यू टर्न ले लिया।