जीत किस की हुई यह तो वे ही जानते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि आम लोगों ने इन दोनों के धरनों को ड्रामे के ज्यादा तवज्जो नहीं दी। आम आदमी पार्टी स्वयं को इस बात की तस्सली दे रही है कि उसे पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा कई भाजपा नेताओं व सपा व अन्य पार्टियों का समर्थन मिल गया।
वहीं भाजपा विधायक इस बात को लेकर खुश है कि उन्होंने आप के धरने को खत्म करवाने में अहम भूमिका अदा की। अधिकारी इस बात पर खुश हैं कि उनके रवैये के चलते सरकार धरने पर बैठने को मजबूर हुई और उनकी अहमियत बढ़ी।
कुछ भी हो, लेकिन सरकार व अधिकारियों को अब सबक तो मिल ही गया कि बिना कारण अहम का मुद्दा बनाने से नुकसान ही है और संभवत: भविष्य में इस प्रकार की नौबत न आए।