मेरठ के हाशिमपुरा दंगा मामले में तीन पीएसी जवानों के आत्मसमर्पण नहीं करने पर अदालत ने बुधवार को उनके गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। 22 मई 1987 को 42 मुस्लिम युवकों को अगवा कर उनकी हत्या करने के मामले में हाईकोर्ट ने पीएसी के 16 जवानों को 31 अक्तूबर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को 22 नवंबर तक आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था। इस आदेश के बाद 11 दोषियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि एक दोषी कमल सिंह की मौत हो चुकी है। अन्य चार दोषी फरार चल रहे थे। बुधवार को तीस हजारी अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार गोयल के समक्ष इस मामले में यूपी पुलिस ने अपनी रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने कहा कि मामले में तीन दोषियों रामबीर सिंह, लीलाधर व बसंत वल्लभ की गिरफ्तारी के दबिश डाली जा रही है।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी में थोड़ा समय लगेगा। यूपी पुलिस ने अदालत को बताया कि चौथे दोषी बुद्घि सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को उसे आत्म समर्पण करने के लिए 9 जनवरी तक का समय दिया है। जस्टिस गोयल ने थाना लिंक रोड गाजियाबाद प्रभारी के आग्रह पर रामबीर, लीलाधर व बसंत के गैरजमानती वारंट जारी कर दिए। साथ ही तीनों को नौ जनवरी तक गिरफ्तार कर पेश करने का निर्देश पुलिस को दिया।
जमानतियों पर पड़ेगी फरारी भारी
अदालत ने तीनों फरार दोषियों की जमानत देने वालों को भी नोटिस जारी कर दिया है। बसंत वल्लभ का जमानती बुधवार को ही अदालत में भी मौजूद था। अदालत ने दोषी को पेश न कर पाने के चलते उसकी 15 हजार रुपये की जमानत राशि जब्त करने का भी आदेश जारी कर दिया।