क्या केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने सीजीएसटी के इस प्रकार की शक्ति से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 और 132 को असंवैधानिक, गैरकानूनी, अप्राप्य और अल्ट्रा वायर्स के रूप में घोषित करने की मांग वाली याचिका पर यह नोटिस जारी किया है। अधिनियम की धारा 69 एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए शक्ति से संबंधित है और धारा 132 कुछ अपराधों की सजा से संबंधित है जहां कोई व्यक्ति अपराध करता है या अपराध का कमीशन देता है।
खंडपीठ ट्रांसलाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरुण गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में सीआरपीसी के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि किसी भी अपराध में जांच तय प्रक्रिया अपनाया जाए।
डीजीजीआई ने गुप्ता पर माल की आपूर्ति के बिना नकली चालान जारी करने और सीजीएसटी अधिनियम के तहत कथित रूप से 13 करोड़ रुपये की राशि का घपला करने का आरोप लगाया है।
सुनवाई के दौरान, गुप्ता की और से पेश अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने अदालत को एक वीडियो क्लिप दिखाते हुए दावा किया कि डीजीजीआई अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के कर्मचारी को कथित रूप से थप्पड़ मारा और उनके साथ धक्कामुक्की की। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि अधिकारियो को उनके मुवक्किल के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका जाए।
खंडपीठ ने सभी तथ्य देखने के बाद सुनवाई 22 दिसंबर तय करते हुए याची गुप्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इतना ही उन्होंने याची के घर और गोदाम को सील न करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने याची को पूछताछ के लिए उप निदेशक, डीडीजीआई के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया है।