यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल उस समय खुल गई जब यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने जीरो प्वाइंट से आगरा तक का सफर कर इंतजाम का निरीक्षण किया। सफर के दौरान सीईओ को एक्सप्रेसवे पर कई खामियां दिखीं। सीईओ ने इन खामियों को दूर करने के लिए एक्सप्रेसवे प्रबंधन को एक सप्ताह का समय दिया है।
डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे सबसे बड़ी खामी नियमों की अनेदखी करने वाले वाहनों का चालान काटने में दिखी। उन्होंने पाया कि पुलिस वाले सिर्फ हाजिरी लगाकर चंद मिनट बाद ही चले जाते हैं, जिससे वाहन चालक अपनी मनमानी करता है।
उन्होंने यमुना प्राधिकरण में तैनात दो इंस्पेक्टरों की ड्यूटी लगाई है। ये दोनों टोल पर मौजूद रहेंगे। उनके साथ और स्टाफ भी रहेगा, जिससे सुबह से शाम तक चालान कट सके। सीईओ के मुताबिक खराब और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को एक्सप्रेसवे से शीघ्र हटाने के लिए छह क्रेन हैं, जिसे नाकाफी बताते हुए दो और क्रेन तैनात करने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि एंटी फॉग लाइट और डिस्प्ले बोर्ड सिर्फ प्रवेश और बाहर जाने की प्वाइंट पर ही दिखा। सीईओ ने सभी दुर्घटना संभावित जगहों पर इसे लगाने को कहा है। सीईओ ने परीक्षण के तौर पर खुद ही टोल कंपनी के कॉल सेंटर नंबर पर फोन किया।
उस समय फोन तो उठा, लेकिन मदद कितनी देर में मिलेगी इसकी सूचना एसएमएस के जरिये नहीं दी गई, जिस पर सीईओ ने काफी नाराजगी जताई और एसएमएस के जरिये जवाब देने को कहा। वहीं एक्सप्रेसवे पर मोड़ आदि पर सफेद के बजाय पीला रंग लगाने, हर लेन पर सफेद रंग लगाने आदि के निर्देश दिए। इन्हें पूरा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद फिर निरीक्षण करने की बात कही है।