भारत रत्न और भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अब दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनसे मिलने वाले हर शख्स की जिंदगी को उन्होंने गहरे से प्रभावित किया है। ऐसे लोगों में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। मनीष ने बताया कि दिल्ली में चुनाव जीतने के बाद वह जब वह शिक्षा मंत्री बनें तो वह कलाम साहब से मिलने गए। उन्होंने कलाम साहब को बताया कि दिल्ली सरकार स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है और इस दिशा में आपकी सलाह लेने के लिए ही वो यहां आए हैं।
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25% तक कम करना चाहिए सिलेबस
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कलाम साहब यह सुनकर बेहद खुश हुए और कहा कि उन्हें खुशी है कि वह शिक्षा के बारे में इतना सोचते हैं। इसके बाद कलाम साहब ने डिप्टी सीएम और दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक फॉर्मूला सुझाया था।
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'इस तरह बच सकता है बच्चों का एक साल'
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कलाम साहब ने कहा कि अगर वह वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले वह बच्चों के पाठ्यक्रम को कम करें। कलाम ने उनसे कहा कि बच्चों के सिलेबस को कम से कम 25% तक कम किया जाना चाहिए।
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apj abdul kalam
मनीष सिसोदिया ने बताया कि कलाम साहब का मानना था कि अगर सिलेबस के बोझ से बच्चों को मुक्त किया जाएगा तो उन्हें जीवन को सीखने और समझने के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा। वह चाहते थे कि पढ़ाई के सिलेबस को कम करके उसमें संगीत, कला, साहित्य और खेल-कूद को और जगह दी जानी चाहिए जिससे कि बच्चे जीवन को अच्छे से समझ सकें।
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कलाम साहब ने मनीष सिसोदिया से कहा वह सभी से इस बारे में कहते हैं लेकिन कम ही लोग इस पर ध्यान देते हैं। उनका मानना था कि बच्चों के सिलेबस में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो रिपीट होती हैं। अगर नौवी दसवीं ग्यारहवीं और 12वीं से पाठ्यक्रम में से 25% सिलेबस को कम कर दिया जाए तो चार साल में बच्चों का एक साल बचाया जा सकता है। बच्चों के इस समय को उन्हें अन्य कलाओं को सिखाने में लगाया जा सकता है।
बता दें कि दिल्ली सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए पेश अपने बजट में शिक्षा के लिए आवंटित राशि को पिछले बजट की तुलना में 106% की बढ़ोत्तरी की है। सरकार का दावा है कि आजादी के बाद शिक्षा के बजट में यह पहली सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है।