कांग्रेस के साथ गठबंधन पर चल रही चर्चा के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने दो टूक कहा है कि वह सिर्फ दिल्ली में समझौता नहीं करेगी। कांग्रेस को हरियाणा पर भी आप से बात करनी होगी। कांग्रेस जितनी सीटों पर लड़ने का दावा दिल्ली में कर रही है, उतनी सीटों उसे आप के लिए हरियाणा में छोड़नी पड़ेगी। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में शनिवार को वरिष्ठ नेताओं की बैठक में इसका फैसला लिया गया। बैठक में पार्टी सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय व वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे।
सूत्रों की मानें तो बैठक में मौजूदा दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की सियासी हालात पर चर्चा हुई। वहीं, कांग्रेस के साथ गठबंधन की शर्तों पर भी नेताओं ने अपनी राय रखी। सभी ने माना कि दिल्ली की सातों सीटों पर आप का प्रचार अभियान बेहतर चल रहा है। अभी की हालत में भाजपा व आप के बीच सीधी टक्कर है। ऐसी हालत में एक भी सीट छोड़ने का फैसला कर पाना आसान नहीं होगा। फिर भी, भाजपा विरोधी वोटों को बंटवारा रोककर जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस से चुनाव पूर्व समझौता बेहतर विकल्प है।
सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल ने कांग्रेस से हुई अब तक बातचीत पर संजय सिंह की राय जानी। सभी नेता पार्टी के सिर्फ दिल्ली में समझौता न करने के रुख पर कायम थे। आखिर में तय किया गया कि दिल्ली के साथ हरियाणा में भी समझौता करने के लिए कांग्रेस सहमत है तभी बातचीत आगे बढ़ाई जाए। इसके अलावा आप जिस तरह से पूर्ण राज्य के दर्जे का आंदोलन चला रही है, ऐसे में कांग्रेस को सार्वजनिक घोषणा करनी होगी कि सत्ता में आने के बाद वह दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाएगी।
हरियाणा के लिए आप ने मांगी तीन सीटें
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस दिल्ली में तीन सीटें मांग रही है। इसके एवज में आप का प्रस्ताव है कि कांग्रेस हरियाणा की गुरुग्राम, फरीदाबाद व करनाल सीट आप के लिए छोड़ दे। तीनों सीटों को मांगने का आधार है कि यह दिल्ली से सटी सीटें हैं। आंदोलन के वक्त से ही आप को इन इलाकों से बेहतर समर्थन मिला है। वहीं, इन शहरों मे रहने वाले लोग बड़ी संख्या में दिल्ली आते हैं। कांग्रेस दिल्ली की नई दिल्ली, चांदनी चौक व उत्तर-पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट पर दावा कर रही है।