एंटीलिया केस में एक नया मोड़ सामने आया है। तिहाड़ जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी तहसीन अख्तर के बारे में खुलासा हुआ है कि उसने एंटीलिया के बाहर पार्क कार में विस्फोटक रखने की जो बात मानी थी वह गलत थी। उसने इस पूरे मामले में झूठ बोला था।
दिल्ली पुलिस की जांच में ये बात सामने आई है कि उसने ये झूठ सिर्फ इसलिए बोला था क्योंकि वह अपनी महत्ता बनाए रखना चाहता था। वह चाहता था कि लोग उसके बारे में बातें करते रहें।
10 मार्च को केंद्रीय जांच एजेंसी ने टेलीग्राम पर एक मैसेज ट्रेस किया था, जो एक आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद से जुड़ा था। जैश-उल-हिंद ने मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर 25 फरवरी को खड़ी स्कॉर्पियो में 20 जिलेटिन रखने की जिम्मेदारी ली थी।
टेलीग्राम के इस मैसेज को जब ट्रेस किया गया तो पता चला कि यह तिहाड़ में बंद आतंकी अख्तर के मोबाइल से भेजा गया था। अख्तर को 2013 के हैदराबाद ब्लास्ट केस में मौत की सजा मिली है। जब दिल्ली पुलिस ने अख्तर से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसी ने एंटीलिया के बाहर कार में विस्फोटक रखवाए थे लेकिन बाद में अख्तर ने बताया कि उसने ये सब झूठ बोला था ताकि वो चर्चाओं में बना रहे।
दिल्ली पुलिस के अफसर ने बताया कि हमने रिपोर्ट जमा कर दी है और उसमें बताया गया है कि तिहाड़ में बंद अख्तर ने झूठे दावे किए थे। अख्तर से घंटों पूछताछ की गई। शुरुआत में उसने तो हमें बहकाने के लिए दावा किया कि टेलीग्राम पर बना आतंकी ग्रुप असली है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस की जांच रिपोर्ट में ये भी है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि अख्तर का कोई आतंकी संगठन कभी बना भी था। बाद में उसने कबूल किया कि वो बातें बना रहा था और उसने जांच को गुमराह करने और अपने को चर्चाओं में रखने के लिए झूठ बोला था।
पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि न तो अख्तर, न इंडियन मुजाहिदीन और न ही अख्तर द्वारा कबूले गए उसके आतंकी संगठन का अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक से भरी कार पार्क में कोई हाथ है। इन लोगों की एंटीलिया केस में कोई भूमिका न होने पर अब दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच बंद कर दी है।