एम्स दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. असुरी कृष्णा ने बताया कि संक्रमण रोकने के लिए डायबिटीज नियंत्रण, धूम्रपान से बचाव, ऑपरेशन थिएटर की सफाई और सही समय पर एंटीबायोटिक देना जरूरी है। वहीं, डॉ. अमरचंद बजाज ने कहा कि सफल सर्जरी के लिए असरदार एंटीबायोटिक्स जरूरी हैं, क्योंकि दवाओं के असर न करने पर संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है।
डॉ. अमरचंद ने कहा कि आधुनिक सर्जरी केवल डॉक्टरों की विशेषज्ञता पर ही नहीं, बल्कि प्रभावी एंटीबायोटिक्स की उपलब्धता पर भी निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि अपेंडिक्स, गॉल ब्लैडर या पेट की बड़ी सर्जरी के बाद यदि संक्रमण फैल जाए। दवाएं असर न करें तो मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है।
दुनिया भर में एएमआर एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2019 में बैक्टीरियल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के कारण सीधे तौर पर करीब 12.7 लाख मौतें हुईं, जबकि करीब 49.5 लाख मौतें ड्रग-रेसिस्टेंट संक्रमणों से जुड़ी थीं।
एम्स दिल्ली के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वीके बंसल ने बताया कि अस्पतालों में एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य सही दवा का चयन, ऑपरेशन से पहले उचित समय पर एंटीबायोटिक देना और दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना है।