दिल्ली के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाकों में लगातार गंभीर होते जा रहे वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कदम उठाया है। यमुनापार के इलाकों में हवा की गुणवत्ता अक्सर बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की जाती है जहां सर्दियों के दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक कई बार 400 के पार यानी गंभीर श्रेणी तक पहुंच जाता है।
शास्त्री पार्क, सीमापुरी, करावल नगर, गोकुलपुरी, सीलमपुर और वजीराबाद रोड जैसे इलाकों में भारी ट्रैफिक और सड़कों पर उड़ने वाली धूल के कारण स्थानीय लोगों का सांस लेना तक मुहाल हो जाता है। इस गंभीर समस्या से निपटने और सड़कों पर उड़ने वाले धूल कणों को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए आधुनिक तकनीकों से लैस पांच विशेष वाहनों को मैदान में उतारा जा रहा है।
क्षेत्र के मुख्य मार्गों और व्यस्त सड़कों पर प्रदूषण के मुख्य स्रोत धूल के गुबार को कम करने के लिए कुल पांच वाहन तैनात किए जा रहे हैं जो ट्रक माउंटेड वाटर स्प्रिंकलर एंटी स्मोग गन से पूरी तरह सुसज्जित हैं। ये सभी वाहन पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल सीएनजी चालित होंगे और आधुनिक बीएस-6 उत्सर्जन मानकों का कड़ाई से पालन करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक वाहनों के सड़कों पर नियमित रूप से उतरने से निर्माण सामग्री, टूटी सड़कों और भारी वाहनों की आवाजाही से हवा में घुलने वाली धूल पर तुरंत अंकुश लगेगा।
सात हजार लीटर पानी का टैंक और 320-डिग्री घूमने वाली आधुनिक तकनीक : प्रशासन द्वारा तय की गई तकनीकी विशिष्टताओं के मुताबिक इन पांचों वाहनों की क्षमता बेहद शानदार है। प्रत्येक एंटी स्मोग गन में कम से कम सात हजार लीटर पानी की क्षमता वाला बड़ा वाटर टैंकर होगा। सड़कों पर छिड़काव के दौरान यह गन चारों तरफ असर दिखाने के लिए 320-डिग्री तक घूमने में पूरी तरह सक्षम होगी और इसकी क्षैतिज दूरी कम से कम छह मीटर होगी।
इसके अलावा यह गन ऊर्ध्वाधर दिशा में -5 डिग्री से 40 डिग्री तक झुकाव कर सकेगी। इन अत्याधुनिक गनों से निकलने वाली पानी की सूक्ष्म बूंदों का आकार 30 से 50 माइक्रोन के बीच तय किया गया है ताकि पानी का छिड़काव हवा में मौजूद धूल के बारीक कणों को तुरंत जमीन पर बैठा सके और आसपास के रिहायशी इलाकों की आबोहवा शुद्ध हो सके।
दैनिक संचालन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था
योजना के सुचारू संचालन के लिए सभी पांचों वाहनों को कार्य दिवसों में नियमित रूप से सड़कों पर उतारा जाएगा जिससे स्थानीय निवासियों, राहगीरों और वाहन चालकों को धूल भरी हवा और सांस की दिक्कतों से बड़ी राहत मिल सके। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग और लाइव डैशबोर्ड की पुख्ता व्यवस्था भी की गई है ताकि यमुनापार के नागरिकों को इस पर्यावरण-हितैषी पहल का शत-प्रतिशत जमीनी लाभ मिल सके।
नई दिल्ली को मिली सीएनजी से चलने वाली रोड स्वीपर मशीन
सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने और सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने दिल्ली की पहली पूरी तरह सीएनजी से चलने वाली मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीन शुरू की है। विधायक एवं एनडीएमसी सदस्य वीरेंद्र सिंह कादियान ने बुधवार को पालिका केंद्र से मशीन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
ट्रक पर लगी यह मशीन सड़क से धूल, रेत, बजरी और कचरा एकत्र करने के साथ सफाई के दौरान धूल को दोबारा हवा में फैलने से रोकेगी। विधायक निधि से उपलब्ध कराई गई इस मशीन में छह घन मीटर क्षमता वाला धूल संग्रहण हॉपर और पानी के छिड़काव की व्यवस्था है। इसमें लगे घूमने वाले साइड ब्रश सड़क पर जमा धूल, रेत, बजरी, पत्थर और सूखी पत्तियों को एकत्र कर हॉपर में पहुंचाते हैं। पानी का छिड़काव सफाई के दौरान धूल उड़ने की समस्या को कम करने में मदद करता है।