फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

1984 सिख विरोधी दंगेः आज एक और मामले में आएगा फैसला, दोगुनी हो सकती हैं सज्जन कुमार की मुश्किलें

Wed, 19 Dec 2018 11:52 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सज्जन कुमार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

1984 सिख विरोधी दंगों के एक और मामले की सुनवाई पटियाला हाउस कोर्ट में गुरुवार को होनी है, जिसमें पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार आरोपी हैं।

विज्ञापन


सिख विरोधी दंगों में एक के बाद एक आ रहे फैसलों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में गुरुवार को उस मामले में फैसला आ सकता है जिसमें सज्जन कुमार को हत्या और दंगे भड़काने का आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई ने सज्जन कुमार पर यह दूसरा केस नानवती आयोग की सिफारिशों पर दर्ज किया था। इसमें उनके ऊपर दिल्ली के सुल्तानपुरी में हत्या और दंगा भड़काने का केस दर्ज है।
विज्ञापन


17 दिसंबर को एक फैसले में हुई उम्रकैद

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार को ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट ने सज्जन को हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा भड़काने, आगजनी और धार्मिक  स्थल को नुकसान पहुंचाने की साजिश का दोषी करार दिया। उन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।

विज्ञापन

34 साल बाद इस मामले में आए फैसले में हाईकोर्ट ने तीन अन्य दोषियों कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। दो अन्य दोषियों पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा तीन साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी।

जस्टिस एस. मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल की पीठ ने 207 पेज में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने 73 वर्षीय सज्जन कुमार के दिल्ली से बाहर जाने पर भी रोक लगा दी है। निचली अदालत ने कुमार को इस मामले में 30 अप्रैल 2013 को बाइज्जत बरी कर दिया था।

सज्जन कुमार के खिलाफ नानावती जांच आयोग के समक्ष पीड़िता जगदीश कौर ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने राजनगर क्षेत्र में सज्जन कुमार को भड़काऊ भाषण देते हुए देखा था। दंगे में जगदीश कौर के पति, बेटे और तीन रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई थी। साथ ही दो सिखों के घरों व एक गुरुद्वारे को भी आग लगा दी गई थी। एनडीए सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए जस्टिस नानावटी जांच आयोग बनाया था।

आयोग ने दिल्ली छावनी व पुल बंगश इलाकों में हुई हत्याओं की जांच दोबारा कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच के बाद इन मामलों में 2010 में कड़कड़डूमा जिला अदालत में दो आरोप पत्र दाखिल किए थे।

सियासी संरक्षण पाकर आरोपी बच निकले : हाईकोर्ट

यह आजादी के बाद की सबसे बड़ी हिंसा थी। इस दौरान पूरा तंत्र फेल हो गया था। यह हिंसा राजनीतिक फायदे के लिए करवाई गई थी। आरोपी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर सुनवाई से बच निकले। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें