वर्ष 1984 में सिखों पर हुए दंगों को 32 साल बीत जाने के बाद भी आज तक वे वह भयानक मंजर नहीं भूल पाए हैं। पीड़ितों के जख्म भरने के लिए राज्य ने 193 केसों पर 12 करोड़ सात लाख रुपये देने की घोषणा की है, लेकिन इससे पीड़ित नाराज हैं। उनमें सरकार के खिलाफ गुस्सा है।
बताया गया है कि पटौदी के वार्ड नंबर छह के अमरपुरी के सरदार हरनाम सिंह, अवतार सिंह, किशन सिंह, फतेह सिंह, अर्जून सिंह, भगतसिंह, कपूर सिंह, कुलदीप सिंह, हरभजन सिंह, अमरजीत सिंह तथा हेलीमंडी टोडापुर में हरमिन्द्र सिंह सहित 17 लोगों को मारा गया था। सिखों के घरों, दुकानों को जलाकर लूट की गई थी।
गुरूद्वारा सिंह सभा पटौदी के प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार गुरजीत सिंह ने बताया कि 84 के सिख कत्लेआम के दौरान सिखों पर आगजनी, लूटपाट के अलावा उनके लोगों को सरेआम जिंदा जला दिया गया था। मृतक परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक-एक करोड़ रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए।
इधर, पीड़ित परिवार की वृद्ध महिलाओं ने आप बीती बताई। जीवनी बाई ने अपने पति किशन सिंह व तीन बेटों को उस हादसे में खो दिया था। उन्होंने रोते हुए बताया कि मैं उस घड़ी को 32 साल बीत जाने के बाद भी आज तक भुला नही पाई हूं।
सरकार ने तो हमारे जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। अमृतकौर ने बताया कि उस हादसे में अपने पति अमरजीत सिंह को खो चुकी हूं। घटना को आज तक भूलती। सरकारों ने पीड़ितों को सरकारी नौकरियां तक नहीं दीं और पीडित परिवारों ने अपने बलबूते पर बच्चों को पाला। अब सरकार थोड़ी सी रकम देकर जख्मों पर नमक छिड़क रही है।