गोपाल बाबू ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पत्नी को पढ़ाने के लिए ट्यूशन तक पढ़ाया और उनकी सरकारी नौकरी लगवाई, लेकिन जब उनकी सरकारी नौकरी छूट गई तो उन्होंने भी उनको छोड़ दिया और किसी अन्य अधिकारी के साथ उनके संबंध बन गए हैं। उनका आरोप है कि जब शादी होकर आई थीं तब उनकी पत्नी ने मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स किया हुआ था।
वह बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक पद पर तैनात थे साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने पत्नी को भी पढ़ाया और सरकारी नौकरी कराई। उनकी नौकरी समाज कल्याण विभाग कानपुर में लग गई। सरकारी नौकरी लगने के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनने लगी। 1993 में शादी हुई थी और उसके बाद दो बच्चे हुए।
उनका आरोप है कि पत्नी ने बच्चों को भड़का दिया है कि मैं उन बच्चों का पिता नहीं हूं, जिसकी वजह से बच्चे भी उनको पिता नहीं मानने से इनकार करते हैं। कानपुर में उनके घर पर भी कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग दो वर्ष से वह दोनों अलग रह रहे हैं। नौकरी और घर छूटने के बाद वह अपने अलीगढ़ स्थित पैतृक घर रहने आ गए हैं।