राजधानी में दधीचि देह दान समिति की ओर से रविवार को देहदानियों का वार्षिक उत्सव आयोजित किया गया।
इस मौके पर एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में जितने लोग ब्रेन डेड होते हैं, अगर वे अंगदान कर दें तो अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे लोगों की प्रतीक्षा सूची खत्म हो सकती है।
भारत में महज 0.2 फीसदी ब्रेन डेड मरीज ही अंगदान करते हैं। ऐसे में लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में जान गंवा देते हैं। कार्यक्रम में 40 परिवार के सदस्यों ने मृत्यु के बाद अंगदान करने का संकल्प लिया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि विदेशों में ब्रेन डेड के बाद 70 फीसदी मरीजों के परिजन उनका किडनी और हृदय सहित कई अंग जरूरतमंदों के लिए दान कर देते हैं, जबकि भारत जैसे देश में ब्रेन डेड के बाद अंगदान का प्रतिशत बहुत कम है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि अंगदान के लिए नियम-शर्त्तों को भी आसान बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में 214 लोगों ने मृत्यु के बाद अपना शरीर मेडिकल कॉलेज और रिसर्च संस्थानों को रिसर्च करने के लिए दान करने संकल्प लिया।