- एनीमिया बना साइलेंट खतरा, समय पर इलाज और सही आहार जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में बच्चों के बीच एनीमिया (खून की कमी) तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है, जिसका असर अब उनकी पढ़ाई और एकाग्रता पर साफ दिखने लगा है। डॉक्टरों के अनुसार, खून की कमी से जूझ रहे बच्चे जल्दी थक जाते हैं और कक्षा में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, जिससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है। गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि एनीमिया से पीड़ित बच्चों में चक्कर आना, सिरदर्द, सुस्ती और कमजोरी जैसे लक्षण आम हैं। कई बार अभिभावक और शिक्षक इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता और बच्चे धीरे-धीरे पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते सही आहार और उपचार से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। अभिभावकों को बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए और उन्हें आयरन युक्त संतुलित आहार देना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि एनीमिया को नजरअंदाज किया गया तो यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में स्कूल और अभिभावकों को मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी।