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'ईरानी जी मैं 'बच्चा' नहीं आपका राजनीतिक विरोधी'

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जेएनयू के देशद्रोह के आरोपी छह छात्रों में से एक अनंत प्रकाश ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को खुला पत्र लिखा है। इसमें उसने कहा है कि वह एक बच्चा नहीं बल्कि उनका राजनीतिक विरोधी है।
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बता दें कि संसद में स्मृति ईरानी ने हैदराबाद विवि के दलित शोधार्थी रोहित वेमुला के लिए ‘बच्चा’ शब्द का उपयोग किया था। रोहित ने संस्थान के छात्रावास में अपने कक्ष में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली थी।

इसी के बाद जेएनयू के छात्र अनंत प्रकाश ने स्मृति को खुला पत्र लिखते हुए कहा है कि मैंने संसद में दिया गया आपका भाषण सुना। मैं आपको स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह पत्र एक बच्चे की ओर से ‘मां स्वरूप’ मंत्री को नहीं बल्कि एक राजनीतिक व्यक्ति की ओर से दूसरे राजनीतिक व्यक्ति को है।
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'पढ़ें मनुस्मृति छोड़ देंगी बीजेपी'

अनंत प्रकाश ने अपने पत्र में आगे कहा है कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं किसी शख्स की गुणवत्ता को उसकी शैक्षिक योग्यता से नहीं मापता। बल्कि मैं तो गुणवत्ता के कॉन्सेप्ट को खारिज करता हूं।

प्रकाश ने कहा कि मंत्री अपनी पहचान एक महिला के तौर पर बताती हैं लेकिन वह वेमुला की मां के साथ खड़ी होने में नाकाम रहीं। वेमुला की मां एक दलित महिला हैं और पितृसत्तात्मक समाज में उन्होंने अपने बच्चों को बड़ा किया और उन्हें पहचान दी।

अनंत ने आगे पूछा कि लेकिन आपकी सरकार क्यों उनके बच्चों के साथ उनके पिता की पहचान जोड़ती है। साथ ही प्रकाश ने स्मृति ईरानी को मनुस्मृति पढ़ने की सलाह दे डाली है और उम्मीद जताई कि एक महिला के तौर पर इसे पढ़ने के बाद वह बीजेपी छोड़ देंगी।

'हमारा पक्ष सुने बिना ही बना दिया दोषी'

प्रकाश ने अपने पत्र में लिखा है कि आपने अपने भाषण में कहा है कि रोहित की हत्या को लेकर राजनीति हो रही है। लेकिन आप इतनी नौसीखीया हैं कि यह न समझ सकें कि उसकी मौत भगवा राजनीति के कारण हुई।

अनंत ने स्मृति पर उसके व अन्य जेएनयू के छात्रों का नाम लेने के लिए भी स्मृति पर हमला किया है। उसने कहा कि क्या आप स्वाभाविक न्याय की प्रक्रिया नहीं जानतीं कि संबद्ध पक्ष को सुने बिना कोई फैसला नहीं किया जा सकता।

एक जांच समिति ने हमें सुने बिना ही हमें रोक दिया। क्या संसद में सर्वाधिक असंवैधानिक तरीके से हमारे नामों की घोषणा करते समय आपको सावधानी नहीं बरतनी चाहिए थी। छात्रों और शिक्षकों का आरोप है कि स्मृति ने संसद में उस आधी अधूरी रिपोर्ट का हवाला दिया जो विश्वविद्यालय ने बिना जांच के सौंपी है।
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'क्या आप नहीं जानती कि हमारे ही देश में कई लोग महिषासुर को पूजते हैं?'

अनंत प्रकाश ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि हम आपसे दया की उम्मीद नहीं करते। बल्कि आपके पास जितनी क्षमता हो उतनी मजबूती से हमपर वार करें और हम भी अनपी सारी शक्ति जुटाकर आप पर उतनी ही तेजी से वार करेंगे।

अनंत स्मृति पर महिषासुर वाले बयान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि क्या आप नहीं जानती कि हमारे देश में तरह तरह की विचार रखने वाले लोग हैं और कुछ लोग महिषासुर को पूजते भी हैं। मैं कम्यूनिस्ट हूं और नास्तिक हूं। पर मैं मानता हूं कि हर किसी को अपने धार्मिक मत मानने का हक है।

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष अनंत उन पांच छात्रों में से है जिनकी पुलिस को राजद्रोह के एक मामले में तलाश है। यह मामला संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी के विरोध में एक कार्यक्रम को लेकर है जिसमें कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगाए गए थे।

ये छात्र जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार की 12 फरवरी को गिरफ्तारी के बाद से नदारद हो गए थे और पिछले रविवार को फिर से परिसर में नजर आए।
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