नई दिल्ली। आरके पुरम स्थित तिरुवल्लुवर ऑडिटोरियम के तमिल संगम में अनंत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भारतीय शास्त्रीय कलाओं की विविध परंपराओं को एक साझा भावभूमि में पिरोया गया। ‘समन्वय’ ने अलग-अलग संगीत परंपराओं के मिलन को स्वर दिया, वहीं, ‘गोवर्धन लीला’ में भगवान कृष्ण से जुड़ी प्रसिद्ध कथा को दर्शाया गया। इसके अलावा ‘संवाद’ ने कलाकारों के बीच होने वाले उस मौन संवाद को केंद्र में रखा, जो लय, संगीत और नृत्य के माध्यम से आकार लेता है। संध्या की समाप्ति पर भार्गवी सुदर्शन ने कहा, कि प्रस्तुति खत्म हो सकती है, पर संगीत चलता रहता है, कथा आगे बढ़ती रहती है और लय निरंतर बहती रहती है। शास्त्रीय संध्या की सूत्रधार प्रख्यात कथक नृत्यांगना भार्गवी सुदर्शन रहीं। संवाद