मिलावटी दूध
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हवा, पानी और खाना ये हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में हैं और हर व्यक्ति इस बात का प्रयास करता है कि वो इन चीजों की अच्छी गुणवत्ता अपने और अपने परिवार के लोगों को उपलब्ध कराए। इसके लिए वह हर तरह का जतन करता है, लेकिन क्या हम जो खा रहे हैं, वाकई वह शुद्ध है या उसमें मिलावट है। हमें तो यही लगता है कि हम जो खा रहे हैं वह पूरी तरह शुद्ध होता है, इसके लिए जो भी बेहतर मिलता है हम उसे ही खरीदते हैं।
लेकिन अब सावधान हो जाइए। बाजार में हर सामान मिलावटी मिल रहा है, जो आपके और आपके परिवार की सेहत को खराब करने के लिए काफी है। ताजा मामला बवाना थाना क्षेत्र में देखने को मिला। जहां पर पुलिस ने फूल झाड़ू के चूरे से नकली जीरा बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।
अपने आप में यह पहला मामला नहीं है और इसी विषय की गंभीरता को देखते हुए अमर उजाला आज ग्राउंड रिपोर्ट आपके सामने पेश कर रहा है जिससे आप जान सकेंगे कि किन-किन चीजों में मिलावट हो रही है और इन्हें किस तरह से पहचाना जा सकता है...
नकली जीरा बनाते आरोपी
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दिल्ली एनसीआर: फूल झाड़ू के चूरे और गुड़ से बना रहे नकली जीरा
स्वाद बढ़ाने के लिए हम खाने में जीरे का प्रयोग करते हैं, लेकिन अब यह जीरा भी शुद्ध नहीं रहा। दिल्ली के बवाना थाना पुलिस ने फूल झाड़ू के चूरे से नकली जीरा बनाने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पूंठखुर्द स्थित फैक्टरी से सरगना और वहां काम कर रहे चार मजदूरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने फैक्टरी से तकरीबन बीस हजार किलो नकली जीरा और 8075 किलो कच्चा पदार्थ बरामद किया है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी फूल झाड़ू के चूरे में गुड़ का शीरा और पत्थर का पाउडर मिलाकर नकली जीरा तैयार करते थे। जब ये सच्चाई सामने आई तो पुलिस भी हैरान रह गई। कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में ये आरोपी लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
ऐसे बनाते थे नकली जीरा
अब नकली जीरे के बनाने के तरीके को भी जान लीजिए जरा। आरोपियों ने बताया कि सबसे पहले फूल झाड़ू का चूरा कर देते थे। इसके बाद गुड़ को गर्म कर उसका शीरा तैयार किया जाता था। शीरा में झाड़ू के चूरे को डालकर उसे मिला दिया जाता था। मिलाने के बाद उसे कुछ देर सुखाया जाता था। इसके बाद उसमें पत्थर का पाउडर मिलाया जाता था। फिर लोहे की बड़ी छलनी से उसे छान लिया जाता था। छलनी का छेद उतना बड़ा होता जिसमें से जीरा निकल सके।
सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि मिलावटी जीरे में घातक रसायन और डाई का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इसे बनाने में पत्थरों का इस्तेमाल भी करते हैं। यह सीधे तौर पर कैंसर को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही इससे किडनी पर असर पड़ सकता है। मिलावटी जीरे के इस्तेमाल से लिवर को भी नुकसान हो सकता है।
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देहरादून : डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, यूरिया से बन रहा दूध
दूध पीने से सेहत बनती है, ऐसा बहुत पहले से आपलोग सुनते आ रहे होंगे, लेकिन जिस दूध की हम बात करने जा रहे हैं, वह आपकी सेहत बनाएगा नहीं बल्कि बिगाड़कर रख देगा। अधिकांश लोग डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, यूरिया और पानी मिला दूध पीते हैं। मिलावटी दूध के कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरिया, कास्टिक सोडा और इसमें मौजूद फोरमेलिन से गैस्ट्रोएंट्राइटिस से लेकर इम्पेयरमेंट, दिल के रोग और कैंसर हो सकते हैं। यहां तक कि मिलावटी दूध पीने से मौत तक हो सकती है। डिटर्जेंट से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।
हाई एल्केलाइन से शरीर के तंतु क्षतिग्रस्त और प्रोटीन नष्ट हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक देहरादून के पटेलनगर थाना पुलिस ने तीन सितंबर 2019 को शिमला बाईपास रोड भुड्डी गांव के पास नकली दूध पनीर, मावा फैक्ट्री में छापेमारी की थी। जहां भारी मात्रा में जहरीला दूध बनाने का कच्चा माल, यूरिया डिटर्जेंट केमिकल बरामद हुआ था।
मसाले (फाइल फोटो)
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आगरा/मेरठ: मिर्च में पपीते के बीज, नमक में चॉक, नकली मसालों से सावधान
मसालों में भी कई तरह की खतरनाक चीजों की मिलावट हो रही है। जिससे गंभीर बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। मेरठ के डीएन कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विश्रुत चौधरी बताते हैं कि काली मिर्च में पपीते के बीज, नमक में चॉक पाउडर, हल्दी में डाई वाला कलर तो लाल मिर्च र्में ईंटों के चूरन की मिलावट की जाती है।
आगरा के जिला अभिहित अधिकारी एफएसडीए के मनोज वर्मा ने बताया कि खाद्य पदार्थों में अब तक जो मिलावट की रिपोर्ट सामने आई हैं उनके अनुसार मिलावट करने वाले सरसों के तेल में भी आरबी आयल की मिलावट सामने आई है। उन्होंने बताया कि इस्तेमाल की हुई चाय की पत्ती को सुखाकर उसमें रंग मिलाकर बेचने के नमूने सामने आए हैं। कुछ साल पहले पटना में लकड़ी के बुरादे से मीट मसाला बनाने वाली रैकेट का खुलासा हुआ था।
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कानपुर : देसी घी में खा रहे हैं ब्यूटीरिक एसिड सेंट
सेहत बनाने के लिए लोग देसी घी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। मिठाइयां भी देसी घी की बनी हुई हो तो लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं, लेकिन क्या वाकई हम देसी घी ही खा रहे हैं या उसकी शक्ल में कुछ और। जी हां पिछले दिनों कानपुर में लोग देसी घी की जगह ब्यूटीरिक एसिड से बनी चीजें खा रहे थे। कानपुर की आम हो या खास, अधिकतर दुकानों में इसी एसिड से बने देसी घी का इस्तेमाल हो रहा है। ब्यूटीरिक एसिड सेंट रिफाइंड और वनस्पति घी में मिलाने पर देसी घी की तेज गंध पैदा करता है। यह केमिकल बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में घी, मक्खन आदि की खुशबू बढ़ाने के लिए बेहद सीमित मात्रा में होता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के मेडिसिन विभाग के डॉ. एसके गौतम ने बताया कि ब्यूटीरिक एसिड का प्रयोग मिलावट के लिए किया जाता है। ब्यूटीरिक एसिड मिला खाद्य पदार्थ खाने से लिवर, पेट और गुर्दा रोग हो सकता है। यह आपके इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे कैंसर तक हो सकता है।
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मेरठ: कैसे बनता है टमेटो सॉस देखेंगे तो खाना छोड़ देंगे
स्ट्रीट फूड हो या फिर ढाबे या रेस्टॉरेंट में मिलने वाले स्नैक्स, सभी के साथ टमेटो सॉस की डिमांड होती है, लेकिन यह कितना नुकसानदायक है यह शायद किसी को पता नहीं। यहां तक कि अगर आप इसे बनता हुआ देख लेंगे तो खाना छोड़ देंगे। मेरठ की एक फैक्ट्री में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो वहां पर सड़ी हुई सब्जियां गंदगी के बीच रखी गई थी। इन्हीं सब्जियों से टमेटो सॉस बनाया जाता है। जिसे खाकर आप अपनी सेहत बिगाड़ लेंगे। इस नकली सॉस को बनाने के लिए प्रिजरवेटिव एसिटिक एसिड, सोडियम बेंजोएट, अरारोट आदि का प्रयोग होता है। साथ ही कुछ अन्य केमिकल भी डाले जाते हैं।
इसके अलावा नॉन परमिट कलर भी प्रयोग किए जाते हैं जो कपड़े रंगने और ड्राइक्लीन में प्रयोग किए जाते हैं। फैक्ट्री के कर्मचारियों ने बताया कि पहले सब्जियों को सड़ा गलाकर पीसा जाता है, फिर उसमें लाल रंग मिलाया जाता है। अगर ग्रीन चिली सॉस बनानी है तो उसमें हरा रंग मिला दिया जाता है। इसे उबालकर ठंडा किया जाता है और फिर पैकिंग कर बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है।
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लखनऊ: चर्बी, अरारोट का प्रयोग, मिठाइयां भी संभलकर खाएं
मिठाइयों में भी आजकल खूब मिलावट हो रही है। खासकर खोया में बहुत ज्यादा मिलावट होती है। आम आदमी नकली और असली मिठाई की पहचान आसानी से नहीं कर सकता है और यह मिठाइयां काफी नुकसानदायक होती हैं। मिलावट का आलम यह है कि सफेद रसगुल्ला बनाने के लिए दूध के बजाए मैदा, मिल्क पाउडर, वनस्पति घी या चर्बी, अरारोट और केमिकल का प्रयोग होता है। जबकि बेसन से तैयार होने वाली सोन पापड़ी को मैदा और रंग मिलाकर बनाया जाता है। इनका मिश्रण तैयार कर उसे पकाकर मावा तैयार किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिठाइयां आकर्षक नजर आए, इसके लिए तरह-तरह के रंगों से उन्हें सजाया जाता है। जरूरी नहीं हैं कि वे रंग अच्छे और हानिरहित हों। सस्ते रंगों से तो शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव ही पड़ेगा। मिष्ठान पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तेल भी यदि घटिया किस्म का हो तो वह भी हानिकारक ही होता है। मिलावटी मिठाई खाने से लिवर खराब हो सकता है।
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देहरादून : प्लास्टिक युक्त साबूदाना और चावल
चावल की डिमांड भारत में बहुत ज्यादा होती है। इसकी पैदावार भी ठीकठाक है। इसके बावजूद चावल पर मिलावटखोरों की नजर टेढ़ी हो गई है। आप सोच रहे होंगे कि चावल में जो कंकड़-पत्थर मिलते हैं उनकी बात हो रही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हम प्लास्टिक युक्त साबूदाना और चावल की बात कर रहे हैं। गोला गोकर्णनाथ में इस तरह का मामला पिछले दिनों सामने आया।
यहीं देश के कई राज्यों में इस तरह के चावल बड़ी मात्रा में बरामद हुए हैं। सोशल मीडिया में प्लास्टिक के चावलों की सूचना को देखते हुए उत्तराखंड में भी खाद्य विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। इसे लकर कई जगह पर छापे भी मारे जा चुके हैं। इस तरह के चावल के खाने से गंभीर बीमारी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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इस तरह करें पहचान
- मावा की थोड़ी मात्रा को पानी में उबाले, फिर इसमें आयोडीन की कुछ बूंदे डालने पर नीले रंग की परत बनती है तो स्टार्च की मिलावट होती है।
- एक चम्मच मिर्च पाउडर को पानी से भरे गिलास में डाले। पानी रंगीन होता है तो उसमें ईंट या बालू की मिलावट है।
- चावल को हाथों में रगड़ें। अगर हाथों पर रंग लगता है तो कलर की मिलावट है।
- चावल को पकाते वक्त प्लास्टिक चावल में बिल्कुल प्लास्टिक की तरह ही महक आती है, साथ ही यह देर में भी पकता है। जब चावल को पकाया जाता है तो प्लास्टिक चावल के मांड पर सफेद रंग की परत जम जाती है, जबकि असली चावल में ऐसा नहीं होता।
- आटे की रोटी कम फूलती है और स्वाद फीका है तो मिलावट है।
- चाय की पत्ती की जांच चीनी मिट्टी के बर्तन या शीशे के प्लेट पर नींबू डालकर उस पर चाय की पत्ती पीसकर डाले यदि नींबू का रस नारंगी या दूसरा रंग होता है तो मिलावट है।
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- शहद में रूई के फाहे को भिगोकर उसे माचिस की तीली से जलाएं। यदि रूई का फाहा नहीं जलता तो उसमें चीनी और पानी की मिलावट है।
- काली मिर्च को पानी में डाल दें। अगर पपीते के बीज है तो वे पानी पर तैर जाएंगे और काली मिर्च नीचे डूब जाएगी।
- दूध में लेक्टोमीटर से पानी की जांच की जा सकती है। शुद्ध दूध का सापेक्षिक घनत्व 1.030 से 1.0354 तक होना चाहिए।
- बेसन का रंग सामान्य पीला होता है, अगर गहरा पीला है तो कलर या आटे की मिलावट है।
- सरसों का तेल फ्रिज में रखने पर नीचे कुछ जमाव होता है तो मिलावट है।
- नकली जीरे की पहचान के लिए जीरे को एक कटोरी पानी में डाल दें। पानी में कुछ देर रहने के बाद नकली जीरा गलने लगता है। उसका रंग छूटने लगता है। असली जीरा पानी में डालने के बाद भी बदलता नहीं है।
- नमक को कांच के साफ गिलास में पानी में घोले। कुछ समय बाद अगर रेत मिट्टी होगी तो वह गिलास की तली में बैठती है, अगर ऐसा होता है तो मिलावट है।