मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी के आखिरी सप्ताह में दिल्ली के ही एक व्यक्ति ने तीन बड़े अस्पतालों की शिकायत की थी। जांच में पाया गया कि कई और अस्पताल भी ऐसा ही कर रहे हैं। फिलहाल जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही अस्पतालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।
कंपनियों पर बनाया दबाव
ऑल इंडिया सिरिंज एंड नीडल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रमुख विमल खेमका ने बताया कि एनपीपीए के निर्देश पर एसोसिएशन से जुड़ी तमाम कंपनियों ने अस्पतालों के दबाव में न आने का फैसला लिया था। छपी कीमत न बढ़ाने पर सहमति बनी थी। इससे दामों में 40 फीसदी तक गिरावट आई है। लेकिन बड़े निजी अस्पतालों ने कंपनियों को ऐसा न करने की चेतावनी दी है।
15 भारतीय और एक विदेशी कंपनी ने कीमतों पर नियंत्रण किया, लेकिन अन्य कंपनियां इससे दूर रहीं। उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल कीमतें घटा चुकी कंपनियों से सिरिंज खरीदने के बजाए प्राइस कैपिंग से बाहर रही कंपनियों से खरीददारी कर रही हैं।