ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर बना पंचायत घर भी मेट्रो परियोजना के लिए तोड़ दिया गया, लेकिन उसका कोई विकल्प नहीं बनाया गया। नंगली रजापुर के मुख्य मार्ग पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां रेहड़ी-पटरी वालों का अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात के कारण ग्रामीणों को गांव से बाहर जाने के लिए घंटों का समय लग जाता है। यह स्थिति रोजमर्रा के जीवन को मुश्किल बना रही है। इसके अलावा सीवर व्यवस्था बेहद खराब है।
यमुना में बाढ़ आने से पहली बार उजड़ा गांव
नंगली रजापुर यमुना नदी के पास बसा हुआ था, मगर वर्ष 2014 में यमुना नदी में बाढ़ आने पर इस गांव के निवासियों को पुराना किला में बसा दिया। मगर वर्ष 1934 में गांव वालों को एक बार फिर यमुना नदी के पास बसा दिया गया। उनको वर्ष 2014 से पहले वाले स्थान के बजाए नए स्थान पर बसाया गया। इस दौरान गांव में 64 परिवार थे और उनको एक-एक प्लाट दिया गया, मगर कानूनी दिक्कतों की वजह से वह अपने प्लाट की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे है।
कृषि भूमि अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा न दिए जाने और अब खेती न करने देने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। डीडीए ने सही पैमाइश नहीं की है और वह उनके खेताें पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। वह आए दिन उनके खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद कर देता है। - भोपाल सिंह
दिल्ली में कृषि भूमि की म्यूटेशन की शुरूआत का उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है। प्रशासन ने उनके गांव के किसानों की म्यूटेशन करने की प्रक्रिया आरंभ नहीं की। जबकि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गईं। - राजकुमार
गांव में ना तो कोई सरकारी स्कूल है और ना ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व डिस्पेंसरी है। ग्रामीणों को बीमार और बच्चों को शिक्षा के लिए दूसरे इलाकों में जाना पड़ता है। इस कारण उन्हें लग रही नहीं रहा है कि देश आजाद हो चुका है और उनका गांव शहरीकृत है। - जोधा सिंह
गांव में न तो पार्क है और न ही पंचायत घर व चौपाल है। इस कारण उन्हें शादी आदि कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्य करने में दिक्कत हो रही है। गांव वालों को ऐसे कार्यक्रम करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इस तरह उन्हें भारी राशि खर्च करनी पड़ती है।- सुल्तान सिंह
गांव में सीवर लाइनें आए दिन ओवरफ्लो होती रहती हैं, जिससे सड़कें व गलिया पानी से भर जाती हैं। बरसात के मौसम में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब गांव में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे भी पैदा होते हैं। - जयकिशन