संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र स्थित डीएसआईआईडीसी कॉम्पलेक्स के कारोबारी काफी समय से अवैध पार्किंग, अतिक्रमण, असुरक्षा जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। बुधवार को आयोजित 'अमर उजाला संवाद' कार्यक्रम में कारोबारियों ने बताया कि वे नियमित रूप से निगम को टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें जर्जर सड़कें और असुरक्षा ही मिल रही है। कारोबारियों का गंभीर आरोप है कि एमसीडी के हिस्से के काम भी उन्हें अपने निजी फंड से कराने पड़ रहे हैं। सड़कों की हालत इतनी खस्ता है कि जगह-जगह गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं। स्ट्रीट लाइटें बंद होने से रात के समय फैक्ट्रियों से निकलने वाले हजारों श्रमिकों की सुरक्षा खतरे में है और इलाके में चोरी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं।
कार्यक्रम में मौजूद कारोबारियों के अनुसार, इस इलाके में कई फैक्ट्रियां हैं, जहां हजारों लोग कार्यरत हैं। इन सब के बावजूद सुविधाओं पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। क्षेत्र में अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की स्थिति इतनी भयावह है कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तक का प्रवेश मुश्किल हो जाता है। उद्यमियों का कहना है कि बुनियादी ढांचे के अभाव में व्यापार करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।
कारोबारियों ने बताई समस्याएं- जब एमसीडी सफाई नहीं करती और जिम्मेदारी दूसरों पर टालती है, तो हमसे टैक्स क्यों वसूला जाता है? टैक्स देने के बाद भी पूरा इलाका गंदगी के ढेर में तब्दील हो चुका है। - नीरज खन्ना (अध्यक्ष, एमडब्ल्यूए झिलमिल इंडस्ट्रियलिस्ट एसोसिएशन)
औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति हो रही है, रात होते ही झपटमारी और चोरी की वारदातें बढ़ जाती हैं। प्रशासन को तुरंत गश्त बढ़ाकर अपराधियों में खौफ पैदा करना होगा। - तुलसी बलानी (सचिव, एमडब्ल्यूए झिलमिल इंडस्ट्रियलिस्ट एसोसिएशन)
अवैध पार्किंग और लावारिस वाहनों के कारण सड़कों का वजूद खत्म हो गया है। लाल किला ब्लास्ट जैसी घटनाओं से सबक न लेना बड़ी चूक है, इन संदिग्ध वाहनों से कभी भी बड़ी आतंकी घटना हो सकती है। - राजकुमार चौधरी (उपाध्यक्ष, एमडब्ल्यूए झिलमिल इंडस्ट्रियलिस्ट एसोसिएशन)
सड़कों पर स्थाई रूप से खड़े वाहनों को हटाने के लिए कहो तो लोग झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। शासन-प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। - रवि गुप्ता (कारोबारी, झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र)
रेहड़ी-पटरी वालों के कब्जे से रास्ता बंद हो गया है और शाम को असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। ऐसे माहौल में महिला कर्मियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है। - विनोद कुमार (कारोबारी, झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र)
इलाके में विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की लीकेज से उद्यमी परेशान हैं, लेकिन शिकायतों के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है। - सचिन अरोड़ा (कारोबारी, झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र)