घर, रास्ते और स्कूल किसी भी स्थान पर होने वाली गलत हरकतों की अनदेेखी न करें, बल्कि आत्मबल पैदा कर इसका प्रतिरोध करें। मां-बाप, भाई-बहन, शिक्षक आदि को इसकी जानकारी दें। अन्यथा छोटी-छोटी हरकतें बड़ी घटना का कारण बन सकती हैं।
ये विचार कासना कोतवाली प्रभारी सुधीर त्यागी ने व्यक्त किए। वे मंगलवार को कासना स्थित राव काशल पब्लिक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में छात्राओं को सुरक्षा के टिप्स दे रहे थे।
निरीक्षक सुधीर त्यागी ने कहा कि बदलते दौर में छात्राओं को हर जगह सतर्क रहने की जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में घर, परिवार व रिश्तेदारी में भी लड़कियों व महिलाओं की असुरक्षा बढ़ी है। रास्ते से गुजरने के दौरान और स्कूल में भी छात्राओं को सतर्क रहना चाहिए।
लड़कियों में गलत माहौल को भांप लेने की क्षमता ज्यादा होती है। छात्राओं को मन में ठान लेना चाहिए कि वे गलत बात बर्दाश्त नहीं करेंगी। उन्होंने छात्राओं को सुरक्षा के अलावा यातायात नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया।
सुधीर त्यागी ने कहा कि अगर उनके पिता या भाई बिना हेलमेट दोपहिया वाहन लेकर निकल रहे हैं, तो उन्हें टोकना चाहिए। अगर स्कूल बस का ड्राइवर गलत दिशा में चला रहा है, तो उसे भी टोकें।
राव काशल पब्लिक स्कूल के संचालक हरिश्चंद्र भाटी ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पाठशाला का काम विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारना और निखारना है। इस पाठशाला से जो अनुभव मिला है, वह छात्राओं के आत्मबल को बढ़ाएगा।
प्रिंसिपल नित्यानंद शर्मा ने कहा कि छात्राओं को हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए और दुर्भाग्य सेे अगर कोई दुर्घटना होती है, तो उसका विरोध करना चाहिए। कार्यक्रम में मंच संचालन सुनीता भर्तरी ने किया।
छात्राओं के सवाल
10वीं की छात्रा कोमल नेे सुधीर त्यागी सेे सवाल किया कि यहां नहीं जाना, ये कपड़े नहीं पहनने, यह गलत है, इन सब बातों के लिए केवल लड़कियों को ही क्यों टोका जाता है? वहीं, 5वीं की छात्रा निकिता ने सवाल किया कि किसी हरकत की जानकारी देनेे पर भी मां-बाप चुप रहने को कहें, तो क्या करें?
11वीं की छात्रा वर्षा नेे कहा कि गांव में आज भी लड़कियों से कहा जाता है कि 18 साल की होने के बाद नहीं पढ़ने देंगे, ऐसा क्यों? 10वीं की निधि ने कहा कि घर से बाहर सुरक्षा कैसे करें? इसके अलावा निधि भाटी, करिश्मा आदि छात्राओं ने भी सवाल पूछे।
एसएचओ के जवाब
सुधीर त्यागी ने छात्राओं के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि बेटियां हर मां-बाप के लिए बहुमूल्य होती हैं, इसलिए उन्हें बेटी की सुरक्षा की अधिक चिंता रहती है। खुद को इतना मजबूत करो कि परिजनों का आप पर भरोसा कायम हो कि आप अपनी सुरक्षा व ख्याल रख सकते हो।
आत्मरक्षा के गुर सीखें। ग्रुप में रहें। किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका होने पर भीड़ की ओर भागें। शोर मचाएं और घर सेे निकलते समय परिजनों को बताकर जाएं। अगर परिजन साथ न दें, तो शिक्षिका को बताएं और फिर भी सुरक्षा न मिले तो महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करें। पुलिस 24 घंटे आपकी मदद को तैयार है।