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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : जीबी पंत में हर दिन प्रति बेड 17 हजार का खर्चा, प्राइवेट में 25 हजार

Fri, 15 Jun 2018 10:45 AM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
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gb pant hospital - फोटो : अमर उजाला
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सरकार के फैसले को लेकर निजी अस्पतालों ने दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों और अपनी तुलना करते हुए एक शोध किया है। इसमें दावा किया गया है कि दिल्ली के जीबी पंत जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर दिन प्रति बेड सरकार 17 हजार रुपये खर्च करती है। जबकि निजी अस्पताल में यह आंकड़ा 25 हजार तक है।

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अमर उजाला को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के तहत निजी अस्पतालों ने दिल्ली सरकार से इच्छा जताई है कि वे लोगों को एम्स की कीमतों पर इलाज देने को तैयार हैं। लेकिन शर्त यह है कि सरकार पहले वहां की कीमतों को समीक्षा में लेकर आए।

निजी अस्पतालों की इस मांग के बाद स्वास्थ्य महकमा भी सकते में आ गया है। इसकी वजह है कि अभी तक एम्स की कीमतों को लेकर कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली सरकार के पास भी अपने अस्पतालों में होने वाले खर्च का इस तरह कोई ब्योरा मौजूद नहीं है।

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एक बेड पर 7 से 17 हजार का खर्चा

दिल्ली सरकार से जानकारी लेने के बाद निजी अस्पतालों ने शोध शुरू किया। इसके तहत जहांगीरपुरी स्थित बाबू जगजीवन राम मेमोरियल जैसे (सेकेंडरी केयर) अस्पतालों में जनरल वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों पर एक दिन में कम से कम पांच से सात हजार रुपये खर्च करती है।

यही मरीज अगर लोकनायक या जीबी पंत जैसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पहुंचता है तो खर्चा 15 से 17 हजार रुपये पहुंच जाता है। वहीं निजी अस्पतालों में यह खर्च 15 से 25 हजार के बीच आता है। यह खर्च भी उन सुविधाओं (साफ-सफाई, बेड साइड फैसीलीटी, हर चीज की प्रिंटेड रिपोर्ट) के लिए होता है, जो सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल पाता।      

निजी अस्पतालों ने इस तरह दिया प्रति मरीज खर्च ब्योरा
डॉक्टरों की सैलरी          18-22 प्रतिशत      
अन्य स्टॉफ की सैलरी      23- 30 प्रतिशत      
दवाएं और कंज्यूमेबल      28-32 प्रतिशत      
प्रशासनिक खर्च             18-20 प्रतिशत      
विज्ञापन खर्च                5-7 प्रतिशत      
बिजली खर्च                   4-5 प्रतिशत      
रिपेयर और मेंटेनेंस           2-3 प्रतिशत      
गुणवत्ता                      2-3 प्रतिशत      

निजी अस्पतालों पर मनमानी के आरोप लगाने की जगह सरकार एम्स के इलाज का आंकलन कराए। एम्स में इलाज का जो खर्च आएगा, निजी अस्पताल उससे 10 प्रतिशत कम खर्च पर इलाज देने को तैयार हैं। सरकार जब चाहे तब ये सर्वे करा सकती है। सरकारी अस्पतालों में भी हर मरीज के इलाज की बिलिंग होनी चाहिए। भले ही बिल पर 100 फीसदी सब्सिडी हो। इससे मरीज को अपने ऊपर हुए खर्च के बारे में जानकारी मिलेगी। - डॉ. गिरधर ज्ञानी, महानिदेशक, प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन 
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