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एक्सक्लूसिवः सांड ने तोड़ी सांस नली तो चली गई आवाज, डॉक्टरों ने जोड़कर दिया नया जीवन

Mon, 18 Jun 2018 04:59 PM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम्स में हुआ भाल सिंह का ऑपरेशन - फोटो : अमर उजाला
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जग्गा और बलिया जैसे सिर से जुड़े भाइयों को अलग कर इतिहास रचने वाले एम्स के डॉक्टरों ने फिर चुनौतियों का सामना कर अद्भुत इलाज में सफलता हासिल की है। अबकी बार डॉक्टरों ने सांड के शिकार एक ऐसे मरीज को नया जीवन दिया है, जिसके लिए तीन दिन तक 3डी सांस नली पर प्रैक्टिस करनी पड़ी।

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फिर चार घंटे तक कई विभागों के डॉक्टरों ने मरीज का ऑपरेशन किया और उसकी टूटी सांस नली को जोड़कर आवाज वापस लौटाई। डॉक्टरों की मानें तो सांस नली बेहद नाजुक होती है।

कंठ के निचले सिरे को ट्रेकिआ बोला जाता है। एक बार अगर इंसान का ट्रेकिआ चोटिल हो जाए या टूट जाए तो उसे बदलना अभी तक मुमकिन नहीं है। सांड की चोट से ट्रेकिआ का मुख्य भाग टूट चुका था। 

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होश में आते ही आवाज हुई गायब

भाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के चुरू निवासी भाल सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले वह बाइक से जा रहे थे। अचानक सामने से एक सांड ने धावा बोल दिया। पहली चोट खाते ही वह बाइक से नीचे गिर पड़े। दूसरी चोट के बाद  बेहोश हो गए।

होश आया तो गले में बाहर एक सांस नली डली हुई थी। साथ ही गले से आवाज भी नहीं निकल रही थी। डॉक्टरों का कहना था कि इसका इलाज एम्स में ही हो सकता है। जिसके बाद वह ट्रामा सेंटर पहुंचे। 

 इस तरह डॉक्टरों ने ली चुनौती
 सर्जरी विभाग के डॉ. बिप्लब मिश्रा का कहना है कि भाल सिंह जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी आवाज जा चुकी थी। गले में एक सांस नली पड़ी थी। जांच में पता चला कि उनके गले में (कंठ के ठीक नीचे) ट्रेकिआ का मुख्य भाग टूट चुका है। चूंकि इसे बदला नहीं जा सकता। लिहाजा, डॉक्टरों के पास करीब 10 से 11 सेंटीमीटर वाले ट्रेकिआ को सर्जरी के जरिये ठीक करने का ही एकमात्र विकल्प बचा था।

ये सबसे बड़ी चुनौती थी। ट्रेकिआ के टूटे भाग के एक-एक टुकड़ा जोड़ना काफी मुश्किल होता है। करीब चार विभागों के विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद तीन दिन तक ऑपरेशन की योजना बनाई गई। मिश्रा का कहना है कि ऑपरेशन के दूसरे दिन ही भाल सिंह की आवाज लौट आई। ये एम्स की बड़ी उपलब्धि है।
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