राजस्थान के चुरू निवासी भाल सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले वह बाइक से जा रहे थे। अचानक सामने से एक सांड ने धावा बोल दिया। पहली चोट खाते ही वह बाइक से नीचे गिर पड़े। दूसरी चोट के बाद बेहोश हो गए।
होश आया तो गले में बाहर एक सांस नली डली हुई थी। साथ ही गले से आवाज भी नहीं निकल रही थी। डॉक्टरों का कहना था कि इसका इलाज एम्स में ही हो सकता है। जिसके बाद वह ट्रामा सेंटर पहुंचे।
इस तरह डॉक्टरों ने ली चुनौती
सर्जरी विभाग के डॉ. बिप्लब मिश्रा का कहना है कि भाल सिंह जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी आवाज जा चुकी थी। गले में एक सांस नली पड़ी थी। जांच में पता चला कि उनके गले में (कंठ के ठीक नीचे) ट्रेकिआ का मुख्य भाग टूट चुका है। चूंकि इसे बदला नहीं जा सकता। लिहाजा, डॉक्टरों के पास करीब 10 से 11 सेंटीमीटर वाले ट्रेकिआ को सर्जरी के जरिये ठीक करने का ही एकमात्र विकल्प बचा था।
ये सबसे बड़ी चुनौती थी। ट्रेकिआ के टूटे भाग के एक-एक टुकड़ा जोड़ना काफी मुश्किल होता है। करीब चार विभागों के विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद तीन दिन तक ऑपरेशन की योजना बनाई गई। मिश्रा का कहना है कि ऑपरेशन के दूसरे दिन ही भाल सिंह की आवाज लौट आई। ये एम्स की बड़ी उपलब्धि है।