ऐसे में बीटेक की पढ़ायी कर रहे छात्र पढ़ायी का खर्चा उठाने के लिए पार्ट टाइम नौकरी या फिर बैंक से लोन लेते हैं। इस पार्ट टाइम नौकरी के चलते छात्र पढ़ायी पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते हैं। इससे तनाव के साथ -साथ छात्र पढ़ायी में पिछड़ते चले जाते है। कर्ई बार परिवार में पैसों की तंगी के चलते तनाव में आकर छात्र आत्महत्या तक कर लेते हैं।
गौरतलब है कि आईआईटी दिलली में करीब चार हजार छात्रों ने अभी तक अपनी हॉस्टल फीस तक जमा नहीं करवायी है। एक सेमेस्टर की हॉस्टल मैस का बिल करीब 25 हजार रुपये होता है। जबकि सालभर में उन्हें 50 हजार रुपये खाने पर खर्च करने पड़ते हैं।
छात्रों का आंकड़ा मिलते ही इसी सत्र योजना की शुरुआत
पैसे की दिक्कत दूर करने के लिए छात्र पार्ट टाइम नौकरी करते हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के ऐसे मेधावी छात्रों की फीस आदि का खर्चा उठाने के लिए एल्यूमनाई ने आईआईटी प्रबंधन को प्रस्ताव दिया है। मध्यम वर्गीय परिवारों (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में शामिल न होने वाले)के जो छात्र पढ़ायी या हॉस्टल की फीस नहीं भर सकते होंगे, उनकी सूची तैयार होगी। उस सूची को एल्यूनाई के साथ सांझा किया जाएगा। ताकि वे उनकी फीस का खर्चा उठा सके। यह योजना इसी सत्र शुरू होगी।
- प्रो. राजेश खन्ना, डीन ऑफ स्टूडेंट, आईआईटी दिल्ली ।