विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने एक घर में जबरन घुसने संबंधी आरोपों को नकार दिया है। उनके वकील मो. इरशाद ने कहा कि यह अपने तरह का अनोखा मामला है, जब शिकायत करने वाले के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
अतिरिक्त चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के समक्ष गोयल के अधिवक्ता ने कहा कि घटना वाले दिन मौके पर पुलिस, स्थानीय एसडीएम व अन्य लोग थे। ऐसे में कोई कैसे किसी के घर में जबरन घुस सकता है।
उनके मुवक्किल पुलिस के साथ उस घर में घुसे थे। विधानसभा अध्यक्ष और उनके बेटे सुमित गोयल समेत 7 लोगों के खिलाफ दंगा फैलाने और मारपीट करने के आरोप हैं। कोर्ट 17 अप्रैल को निर्णय करेगी कि उन पर ट्रायल शुरू किया जाए या नहीं।
यह मामला 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के एक दिन पहले 6 फरवरी का है। आरोप है कि रामविलास गोयल अपने बेटे और समर्थकों के साथ विवेक विहार इलाके में एक भाजपा नेता मनीष घई के घर में यह कहते हुए घुस गए कि घर में चुनाव में बांटने के लिए शराब रखी गई है।
आरोप है कि जबरन दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे गोयल और उनके समर्थकों ने घई के ड्राइवर से मारपीट की थी। उस समय पुलिस ने घर का सामान जब्त कर रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेज दी थी। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक घर में शराब नहीं थी। पुलिस ने धारा 147, 149, 457 और 323 के तहत मामला दर्ज किया था।