तावडू।
शहर थाना में 2020 में दर्ज मारपीट और धमकी के एक मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट बेनिका की अदालत ने आरोपी चुट्टन उर्फ सोनू, कैलाश और मोनू को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा और प्रस्तुत साक्ष्यों में कई विरोधाभास मिले। मामला एफआईआर अगस्त 2020 से संबंधित था, जिसमें शिकायतकर्ता पवन कुमार ने आरोप लगाया था कि 25 अगस्त 2020 की रात करीब 9 बजे उसके पड़ोसी कैलाश, भीम, छुट्टन, मोनू और सावित्री ने उसके पिता चेतराम, पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि झगड़े के दौरान आरोपियों ने लात-घूंसों और पत्थरों से हमला किया, जिससे परिवार के कई सदस्य घायल हुए।
मामले की पैरवी कर रही अधिवक्ता सुदेश रानी गर्ग ने बताया कि यह मामला पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत था। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच के दौरान ही दो लोगों के नाम मामले से बाहर कर दिए गए थे। अधिवक्ता के अनुसार शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से समझौते के नाम पर करीब पांच लाख रुपये की मांग भी की गई थी और आरोपियों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष मजबूत तरीके से तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने भी अपने फैसले में माना कि शिकायतकर्ता के बयान और मेडिकल सबूतों में गंभीर विरोधाभास थे।शिकायत में कई लोगों के घायल होने और गंभीर मारपीट का दावा किया गया था, जबकि मेडिकल रिपोर्ट में सीमित चोटों का ही उल्लेख मिला। इसके अलावा कथित रूप से घायल बताए गए अन्य परिवारजनों को अदालत में गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और अभियोजन पक्ष को ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने और संदेह की स्थिति उत्पन्न होने पर अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।