नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में कल्चर के जरिए तालाबों, नदियों और जलाशयों में देश के बाहर की मछलियों (एक्जॉटिक कैटफिश) के प्रजनन और पालन पर प्रतिबंध लगा दिया है। पीठ ने कहा कि थाई मगूर और अन्य हाइब्रिड प्रजाति वाली मछलियों का जो भी स्टॉक है उसे तत्काल खत्म किया जाए।
इसके लिए संबंधित जिलाधिकारी और जिला कमिश्नर मत्स्य विभाग के साथ मिलकर तत्काल कार्रवाई करें। वहीं, एनजीटी ने यह भी आदेश दिया है कि सभी मत्स्य पालन करने वालों को मत्स्य विभाग के पास जाकर मछलियों का स्रोत भी बताना होगा।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची हुसैन खान की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। पीठ ने सभी राज्यों के मत्स्य विभाग के निदेशकों को एक महीने के भीतर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल करने का आदेश दिया है।
याची ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलांगना और अन्य राज्यों में थाई मगूर और अन्य हाइब्रिड प्रजातियों की मछलियों का अवैध रूप से पालन किया जा रहा है। थाई मगूर और अन्य हाइब्रिड मछलियों को बिना मंजूरी के ही भारत में लाया गया था। यह मछलियां यहां के पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं। इनसे कई तरह की बीमारियों का भी खतरा है।
थाई मगूर और अन्य हाइब्रिड प्रजातियों की मछलियों का पालन कई राज्यों में चोरी-चुपके किया जा रहा है। यह प्राकृतिक तरीके से नहीं बढ़ती और पलती हैं। देसी मछलियों के मुकाबले कल्चर के द्वारा यह ज्यादा प्रजनन करती हैं। वहीं, इनका मूल्य भी कम है।