जिले में इन दिनों अवैध शराब बिक्री का गोरखधंधा खूब फल-फूल रहा है। जिसमें मेवात की जनता अब पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खडे़ कर रही है।
हालात ये है कि गांव हो या शहर परचून की दुकान पर चीनी-तेल कम बिकता है, बल्कि अवैध तरीके से शराब ज्यादा बिकती है। यह गोरखधंधा लोगों को तेजी से अपनी गिरत में ले रहा है और युवा पीढ़ी लगातार नशे के दलदल में धंसती जा रही है।
वहीं पुलिस को सूचना देने के बावजूद भी नशे के कारोबार को बढ़ा रहे इन लोगों पर कोई कार्यवाई नहीं होती। पुलिस उल्टा शिकायतकर्ता का नाम इन्हें बता देती है और गांव में आपस में इन अवैध शराब व्यापारियों और शिकायकर्ताओं के बीच विवाद पैदा हो जाता है।
परचून की दुकानों पर शराब
गांवों और कस्बों में परचून की दुकान पर अवैध तरीके से शराब बेची जाती है। ये दुकानदार उसी गांव या मोहल्ले के होते है और शराब पीने वालों को उधार दे देते है। इतना ही नहीं गेहूं के बदले भी शराब बेची जाती है।
जिसपर बोतल खरीदने की सुविधा नहीं है, उसे ये दुकानदार उसकी जरुरत व जेब के हिसाब से शराब दे देते है। 5 रुपए में भी शराब दी जाती है तो बोतल, अध्धा व पव्वा के रेट में भी शराब बेची जाती है।
90 फीसदी गांवों में चल रहा धंधा
अवैध शराब का यह धंधा मेवात के कस्बे हो या फिर गांव हर जगह धड़ल्ले से चल रहा है। जिला मुयालय के शहर नूंह में तो इस धंधे के विरोध में सोमवार को महिलाएं भी रोड़ पर उतर आई थी।
नूंह शहर में राममंदिर के पास वार्ड-8, हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के पास बनी एक दुकान के अलावा नूंह खंड़ के गांव खेड़ली-दौसा, इंड़री, खेड़ाखलीलपुर, दूबालू, गांगोली, आलदोका, किरा, छछेड़ा, छपैड़ा, कुर्थला सहित हर गांव में परचून की दुकानों पर अवैध शराब जमकर बेची जाती है।
मुस्लिम युवा भी नेश की गिरफ्त में
इस्लाम में शराब पीने पर पाबंदी है, इसलिए जिन गांवों में केवल मुस्लिम आबादी होती थी, वहां शराब के ठेके दूर-दूर तक नहीं होते थे।
लेकिन अब मेवात का मुस्लिम युवा तेजी से इस गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है और बीयर, कोरेक्स के बाद शराब के नशे का आदी होता जा रहा है। हालात ये हैं कि अब मेवात में सबसे महंगे ठेके छोड़े जाते है।
पुलिस भूमिका संदिग्ध
अवैध शराब को लेकर एक व्यक्ति ने अपने गांव में अवैध शराब व अन्य नशे की सामग्री के खिलाफ ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मंत्री कृष्णलाल पंवार को शिकायत दी थी।
जिस पर मंत्री ने तुरंत पुलिस कप्तान को कार्यवाई करने के निर्देश दिए थे। जिस पर पुलिस ने कार्यवाई के नाम पर एक व्यक्ति को उठाया और उसे भी बाद में छोड़ दिया और शिकायतकर्ता का नाम उन्हें बता दिया था।
खेड़ली दौसा गांव के लोगों ने बताया कि वे कई बार पुलिस से शिकायत कर चुके है, लेकिन पुलिस के आने से पहले ही दुकानदारों को सूचना मिल जाती है और वे अपना सामान छिपा देते है। जिसके चलते पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध लगती है।