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बार में शराब पीना हुआ महंगा, बढ़े रेट, पिछले साल के मुकाबले तीन लाख तक बढ़ी लाइसेंस फीस

Mon, 08 Apr 2019 10:06 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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शराब (सांकेतिर तस्वीर) - फोटो : फाइल फोटो
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सरकार ने एक्साइज पॉलिसी 2019-20 के तहत सालाना बार लाइसेंस फीस में 3 लाख रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे बार में शराब पीना अब महंगा हो गया है। इस फैसले से बार संचालकों में भी नाराजगी है। बार संचालकों का कहना है वह पहले ही घाटे मार झेल रहे हैं। अब लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी होने से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

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बताया जा रहा है कि लाइसेंस फीस बढ़ने से शराब के रेट में करीब 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। वहीं, इस बार संचालकों के लिए शराब बिक्री के लिए कुछ नए शर्तें भी लागू की गई हैं। जिन्हें पूरा नहीं करने पर अगले वर्ष उनका लाइसेंस निरस्त हो सकता है। वित वर्ष 2018-19 में बार की लाइसेंस फीस 12 लाख रुपये थे। इसकी एवज में उनकी के लिए कोई खास नियम व शर्तें लागू नहीं थीं। मगर वितीय वर्ष 2019-20 के लिए लागू की गई नई आबकारी नीति में बार की लाइसेंस फीस में 3 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 

मोक्ष बार संचालक संजय ने बताया कि नई आबकारी नीति के तहत बार संचालक को हर माह विभाग से आईएमएफएल की पांच पेटी शराब खरीदनी होती। इसमें ब्लैक डॉग, सिमरन, ब्लेंडर्स प्राइड इत्यादि शराब शामिल है। इसके अलावा हर माह पांच पेटी बीयर और पांच लाख रुपये की फूड बिक्री होना अनिवार्य हैं। अगर फूड बिक्री पांच लाख रुपये से कम रहती है तो अगले वर्ष बार संचालक का लाइसेंस निरस्त हो सकता है।  
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बिजनेस पर बुरा असर
एक बार संचालक का कहना है कि सरकार की इस नीति का बिजनेस पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बार में पहले से ही घाटा चल रहा है। ऐसे में लाइसेंस फीस बढ़ाने से बार संचालकों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। सरकार का यह फैसला बार संचालकों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। सभी खर्च निकालने के बाद भी महीने में 50 हजार का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। 

नई आबकारी नीति के तहत बार की लाइसेंस फीस में तीन लाख रुपये का बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा नियम व शर्तें भी लागू की गई है जिन्हें अनिवार्य कर दिया गया है। एक माह में पांच लाख रुपये से कम की फूड बिक्री पर लाइसेंस निरस्त हो सकता है। -एसपीएस चौहान, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त, फरीदाबाद

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