उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में दायर आरोपपत्र में पुलिस ने मुस्तफाबाद के एक निजी अस्पताल के मालिक को आरोपी बनाया है, जिसने दंगे के दौरान घायल लोगों का इलाज किया था। इस अस्पताल में फंसे पीड़ितों को दंगाइयों से बचाकर बड़े सरकारी अस्पताल तक भेजने के लिए हाईकोर्ट ने 24 फरवरी की आधी रात में सुनवाई की थी।
पुलिस ने यह आरोपपत्र कड़कड़डूमा कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी पवन सिंह राजावत के सक्षम दायर किया है। पुलिस ने इस मामले में डॉ अनवर के साथ ही नेहरू विहार निवासी अरशद प्रधान को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि फरुकिया मस्जिद पर सीएए और एनआरसी के विरोध में जमा हुए लोगों को 23 फरवरी की रात में दंगे के लिए उकसाया गया था।
पुलिस का आरोप है कि डॉक्टर अवनर और अरशद ने लोगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाई थी। इस बाबत दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने आरोपपत्र में कहा कि डॉ अनवर और अरशद प्रधान से पूछताछ नहीं हो सकी है।
पुलिस ने आरोप लगाया है कि मुस्तफाबाद स्थित अल हिंद अस्पताल के मालिक डॉ. एम.ए अनवर फरुकिया मस्जिद पर विरोध प्रदर्शन के आयोजक थे। साथ ही पुलिस ने आरोपपत्र में डॉ अनवर पर शिव विहार स्थित अनिल स्वीट्स शॉप में काम करने वाले 20 वर्षीय युवक दिलबर नेगी की हत्या का भी आरोप लगाया है।
दिलबर नेगी का कटा हुआ शव 26 फरवरी को पुलिस को अनिल स्वीट्स के गोदाम से बरामद हुआ था। इस आरोपपत्र में पुलिस ने अन्य 12 लोगों को भी आरोपी बनाया है, जिनमें मोहम्मद शाहनवाज उर्फ शानू, मोहम्मद फैजल, आजाद, अशरफ अली, राशिद उर्फ मोनू, शारुख, मोहम्मद शोएब, परवेज, राशिद उर्फ राजा, मोहम्मद ताहिर, सलमान और सोनू सैफी शामिल हैं।