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पहले अखलाक, फिर पहलू और अब जुनैद, जब इंसानियत पर भारी पड़ा बीफ

Wed, 28 Jun 2017 09:30 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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junaid murder
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जुनैद की हत्या के बाद से पलवल का खंदावली गांव चर्चाओं में है। पीड़ित परिवार के घर पर राजनीतिक लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। कोई भाजपा को तो कोई आरएसएस को कोसता नजर आया। इस दौरान कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि परिवार शोक में है, 'बस करो। यह कोई आखिरी जुनैद नहीं है। हर बार मातम होता है, हम लोग ऐसे ही बैठते हैं। क्या हम हर बार ऐसे ही बैठते रहेंगे?
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ये सवाल गौर करने वाली है। ग्रेटर नोएडा का दादरी कांड हो या राजस्थान के अलवर में पहलू खान की पीट-पीटकर हत्या, या फिर ईद के 5 दिन पहले ट्रेन में 16 साल के जुनैद की चाकुओं से गोदकर मर्डर ये ऐसी घटनाएं हैं, जब इंसानियत पर बीफ भारी पड़ी। फिर भीड़ ने खूनी खेल खेला।

कहते हैं भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता। लेकिन, इन तीनों मामलों में भीड़ का चेहरा भी है, नाम भी और पहचान भी। पहले जुनैद मर्डर की बात करते हैं। दिल्ली से मथुरा जा रही ईएमयू में विवाद सीट पर बैठने को लेकर शुरू हुआ था। जुनैद अपने  तीनों भाई के साथ दिल्ली में ईद की खरीदारी करने आया था। लौटने के लिए वे ईएमयू में सवार हुए। सीट खाली मिली तो बैठ गए और वक्त गुजारने के लिए लगे लूडो खेलने। इसी दौरान अगले स्टेशन से लोग सवार हुए। इनमें से कुछ लोगों ने उसे लूडो खेलने से रोका और सीट छोड़ने को बोला।
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इसी बात को लेकर उनके बीच बहस शुरू हो गई। दूसरे पक्ष ने जुनैद के पहनावे और खाने-पीने को लेकर टिप्पणी की। धीरे-धीरे दो पक्षों का विवाद दो संप्रदाय के विवाद में तब्दील हो गया। धक्का-मुक्की से शुरू हुई लड़ाई चाकूबाजी तक जा पहुंची। जुनैद और उसके भाइयों पर हमलावरों ने कई वार किए। भीड़ में से कुछ लोग मारो मारो कहकर हमलावरों को उकसा रहे थे। आरोपी जुनैद को खून से लथपथ असावटी स्टेशन पर उतार कर आगे बढ़ गए। उसकी तरफ किसी ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया। समय पर इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई। 

अब इसका सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इसमें बाइक सवार तीन संदिग्धों को देखा जा सकता है। पुलिस इसके आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है। 

पहलू को पीटने वाले भी आम कस्बाई लड़कों जैसे थे

pahlu khan
राजस्थान के अलवर शहर के पास एक अप्रैल को ट्रैफिक भरे हाइवे पर पहलू खान को चारों ओर से घेर कर पीटे जाने का वीडियो गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि उसे पीटने वाले लड़के आम कस्बाई लड़कों जैसे ही थे। कुछ जींस-टी शर्ट में थे और कुछ पैंट क़मीज़ पहने हुए थे। वीडियो देखकर पूरे विश्वास से कहना मुश्किल है पर उनमें से ज्यादातर निम्न मध्यमवर्ग के परिवारों के नौजवान नज़र आते हैं।

वो पहलू खान को सड़क के बीच से खदेड़ते हुए, पीटते हुए हाइवे के फुटपाथ पर लाते हैं। पूरे हंगामे में सफेद कुर्ता पायजामा पहने हुए पहलू खान फुटपाथ पर बैठ जाते हैं जैसे शिकारी कुत्तों के बीच घिरा हुआ कोई मेमना हो।

हमलावर लड़कों के सिर पर ख़ून सवार है और वो जितना उन्हें पीटते हैं उनका गुस्सा उतना ही बढ़ता जाता है. यहाँ तक कि पहलू खान और उसके साथियों को पीट-पीट कर अधमरा कर देने के बावजूद उनके सिर से खून नहीं उतरता।

दो हमलावर लड़के वहां खड़ी सफ़ेद रंग की एक गाड़ी के स्टील के बोनट को पूरी ताक़त लगाकर मोड़ देते हैं और जब अंदर से इंजन दिखने लगता है तो उनमें से एक भारी पत्थर उठाकर इंजन पर दे मारता है। 
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दादरी कांड में नहीं मिला बीफ

dadri lynching
सितंबर 2015 में दिल्ली के पास दादरी इलाके में अखलाक नाम के अधेड़ को उनके घर से खींचकर निकालने और पीट-पीट कर हत्या कर डालने की घटना को देश के संस्कृति मंत्री महेश चंद्र शर्मा महज़ एक "दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना" बताते हैं। भीड़ ने अखलाक के अलावा उसके बेटे पर भी जानलेवा हमला किया था।

हालांकि, मामले में जांच के बाद भी पुलिस को अखलाक के घर या फ्रिज से कोई बीफ नहीं मिला था। जो मिला था वो मटन था, ना कि बीफ।
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