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मोदी का मुकाबला करने के लिए अखिलेश यादव करेंगे अमेरिकी हथियार ‘रोबोकॉल' का इस्तेमाल

Fri, 25 Nov 2016 12:10 AM IST
एसएस अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा

सार

अखिलेश की सरकार ‘रोबोकॉॅल’ से लड़ेगी चुनाव
-सीएम की टीम अमेरिका जाकर सीख आई गुर
-अभी तक कांग्रेस और भाजपा ने प्रयोग की है तकनीकी
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अख‌िलेश यादव - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जिस वक्त अमेरिका में प्रेसीडेंट के चुनाव हो रहे थे, वहां पर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव की टीम भी मौजूद रही। टीम ने चुनावी दांव पेंच सीखे। अभी तक तो भाजपा और कांग्रेस ही ऐसा करती थी लेकिन पहली बार सपा ने एक टीम तैयार की है जो आधुनिक तौर तरीकों का प्रयोग आगामी विधान सभा चुनाव-2017 में करेगी। इस चुनावी हथियार का नाम है ‘रोबोकॉल’। शीघ्र ही सीएम के समझ टीम अपना प्रजेंटेशन भी करेगी।
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दरअसल, सपा चुनाव के वक्त पुराने तौर तरीके ही प्रयोग करती रही है। पिछले विधान सभा चुनाव -2012 में  जब अखिलेश यादव ने युवाओं की नब्ज भांपकर कंप्यूटर की बात की तो पार्टी को अटपटा भी लगा था लेकिन चुनाव जीतने के बाद पता चला कि प्रदेश का युवा तो अखिलेश के साथ ही था। चूंकि अखिलेश की पढ़ाई लिखाई विदेशों में ही हुई है तो उन्हें पता था कि चुनाव में तकनीकी का प्रयोग न किया गया तो हम पिछड़ जाएंगे।

बताते हैं कि अमेरिका में चुनाव के पहले अखिलेश ने प्रदेश से एक युवा टीम तैयार की। जिसमें  इलाहाबाद से निधि यादव, नोएडा से अनिल यादव, दिल्ली से नासिर, निदा खान और पंखुरी पाठक शामिल रहे। यह टीम कोलंबस सिटी में ठहरी। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्रोन से करार किया गया। यह यूनिवर्सिटी चुनाव के वक्त पूरी दुनिया भर के राजनीतिक लोगों को बुलाकर उन्हें अमेरिकन चुनाव की ट्रेनिंग देती है। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जिरॉल्ड आॉस्टिन की टीम बताती है कि किस तरह से प्रेसीडेंट का चुनाव होता है।
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भारत की करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
चूंकि अमेरिका में शहरी लोग हैं, जबकि भारत की करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण है। वहां पर पैंफलेट या पोस्टर पर चुनाव नहीं होता है। क्या है रोबोकॉल: अमेरिका में रोबोकॉल तकनीकी से ही पूरा चुनाव लड़ा जाता है।

इस मोबाइल तकनीकी की खासियत है कि रिकॉर्डिड मैसेज कंप्यूटराइजेशन ऑटो डायलर के माध्यम से चंद सेकेंड में करोड़ों लोगों को मैसेज भेजे जाते हैं। इसका प्रयोग पोलिटिकल टेलीमार्केट में ही होता है। इसी विधि से प्रत्याशी इमरजेंसी एनाउंसमेंट भी करते हैं। इतना ही नहीं, मैसेज भेजने के बाद किसकी क्या प्रतिक्रिया रही, उसका भी पता चल जाता है।

अमेरिकी चुनाव के वक्त टीम ने 2 माह 20 दिन बिताए। क्या सीखा, इसकी सूचना समय-समय पर सीएम तक पहुंचाई गई। कैंपेनिंग की मॉडर्न तकनीकी जैसे सोसल साइड, डिजिटल, इलेक्ट्रोनिक आदि सीखने के बाद यूनिवर्सिटी ने सर्टिफिकेट भी दिया है। जो कुछ सीखा, उसकी डाक्यूमेंटी फिल्म शीघ्र ही सीएम को सौंपी जाएगी।- अनिल यादव, नोएडा से टीम के सदस्य
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