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अब कांग्रेस मेट्रो किराया कम करवाने के लिए उठाएगी ये बड़ा कदम

Wed, 29 Nov 2017 10:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी में मेट्रो का किराया बढ़ाने के मुद्दे पर केंद्र व दिल्ली सरकार आम लोगों को गुमराह कर रही है। मेट्रो को किराया न बढ़ाने पर 3000 करोड़ नहीं बल्कि मात्र 750 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ना था और दिल्ली सरकार इतनी सब्सिडी देकर किराया बढ़ने से रोक सकती थी।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने चौथी किराया निर्धारण कमेटी की रिपोर्ट में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया है। उन्होंने कहा वे जल्द ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये आम लोगों के हितों की लड़ाई लड़ेंगे।

मंगलवार को कांग्रेस नेता चतर सिंह के साथ संवाददाता सम्मेलन में माकन ने कहा न तो केंद्र सरकार न ही दिल्ली सरकार आम लोगों के समक्ष सही तथ्य रख रही है। दोनों ने चौथी किराया निर्धारण कमेटी की रिपोर्ट को भी एक वर्ष से ज्यादा अवधि तक दबाए रखा ताकि लोगों के सामने सही तस्वीर न आ जाए।
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'बिना किराये में बढ़ोतरी के ही मेट्रो चलाई जा सकती है'

माकन ने कहा कि यदि मेट्रो को मात्र 755.92 करोड़ की राशि प्रति वर्ष सब्सिडी के रूप में दे दी जाए तो लोगों को राहत देकर बिना किराये में बढ़ोतरी के ही मेट्रो चलाई जा सकती है।
उन्होंने कहा 2002 में जब से दिल्ली मेट्रो शुरू हुई है उसमें चौथी बार किराया बढ़ाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) को लेकर बनी पहली किराया निर्धारण कमेटी ने मुंबई मेट्रो के अधिकतम किराये को 40 से बढ़ाकर 45 रुपये करने की सिफारिश की थी।

दूसरी ओर एमएमओपीएल अधिकतम किराए को 45 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये करना चाहते थे। महाराष्ट्र मेट्रोपोलिटन रेल डेवलपमेंट अथारिटी ने प्रस्तावित किराये की बढ़ोतरी को लेकर मुम्बई उच्च न्यायायलय में याचिका लगाई तथा उच्च न्यायालय ने बढ़े हुए किराए पर रोक लगा दी।

​माकन ने कहा यदि आम लोगों के हितो से खिलवाड़ हो रहा था तो दिल्ली सरकार चुप क्यों है। वह अब तक कोर्ट क्यों नहीं गई।
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