साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दिया सुझाव, मौसम और प्रदूषण के स्रोतों के आधार पर होगी निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए पूरे एनसीआर को एक एयरशेड मानकर समाधान तलाश रही है। साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के सामने स्वच्छ हवा पर एक अध्ययन पेश किया। इसमें प्रदूषण के स्रोत, मौसम और उपग्रह आंकड़ों के आधार पर क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था का सुझाव दिया गया।
अध्ययन में कहा गया कि दिल्ली एनसीआर का प्रदूषण किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहता। इसलिए पूरे क्षेत्र में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, जमीनी निगरानी और मौसम पूर्वानुमान को एक साथ इस्तेमाल करने का सुझाव है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन करीब 13 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके अलावा, प्रतिदिन 30 से 35 हजार मीट्रिक टन पुराने कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। सरकार वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकॉनमी पर काम कर रही है। दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जा रही है और ई-कचरे का पुनर्चक्रण भी हो रहा है।
छात्रों के प्रमुख सुझाव
अध्ययन में वाहनों के लिए उत्सर्जन आधारित नियम बनाने का सुझाव दिया गया। ईंट भट्ठों के प्रदर्शन में सुधार और पराली को आर्थिक मूल्य देने की बात कही गई। अनौपचारिक पुनर्चक्रण तंत्र को औपचारिक बनाने पर भी जोर दिया गया। स्वच्छ खाना पकाने के साधनों को बढ़ावा देने जैसे उपाय भी सुझाए गए। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के शोध से दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।