पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने सोमवार को वायु गुणवत्ता के खतरनाक स्थिति में पहुंचने के बाद दिल्ली-एनसीआर में 26 दिसंबर तक के लिए निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, आम लोगों से अपील की गई है कि वे अगले चार से पांच दिन कम से कम वाहन सड़कों पर चलाएं। सोमवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के टास्क फोर्स की सिफारिश पर गौर करने के बाद ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिव को यह आदेश दिया।
सोमवार को लगातार तीसरे दिन दिल्ली-एनसीआर की हवा खतरनाक श्रेणी की बनी हुई है। सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 आपात स्तर को पार कर गए हैं। सोमवार को दिल्ली का एक्यूआई 448, गाजियाबाद का एक्यूआई 456, ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 450, फरीदाबाद का एक्यूआई 440, गुरुग्राम का एक्यूआई 330 और नोएडा का एक्यूआई 464 रिकॉर्ड किया गया।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने कहा है कि सोमवार से ही प्रतिबंध लागू माना जाएगा। सभी निर्माण कार्यों से जुड़े प्राधिकरणों को तत्काल गतिविधि रोकने का आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं, ईपसीए ने सड़कों पर वाहनों के बिना रुकावट परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को मुस्तैदी बढ़ाने को भी कहा है। ईपीसीए ने कहा कि संबंधित पुलिस विभाग पूरी सख्ती के साथ यह तय करें कि भारी वाहन पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर ही चलें।
फरीदाबाद, गुरुग्राम, में भी निर्माण कार्यों पर पूर्ण रोक लगाने की सिफारिश की गई थी
सीपीसीबी ने ईपीसीए को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के हॉटस्पॉट वाले औद्योगिक क्षेत्र वजीरपुर, मुंडका, नरेला, बवाना, साहिबाबाद और फरीदाबाद में औद्योगिक गतिविधि पर रोक लगाने और फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद और नोएडा में निर्माण कार्यों पर पूर्ण रोक लगाने की सिफारिश की थी।
अवैध औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई
ईपीसीए ने आदेश न मानने वाली और अवैध औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का भी आदेश दिया है। साथ ही संबंधित एजेंसियों को जमीनी कार्रवाई पर ज्यादा से ज्यादा केंद्रित रहने को कहा है। एजेंसियों को हिदायत दी गई है कि वह खासतौर से प्रदूषण गतिविधियों को रोकने और जलाए जाने वाले कचरा पर अंकुश लगाएं।
प्रदूषण बिखेरने में सक्षम नहीं हवा
ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने कहा कि वेंटिलेशन सूचकांक बेहद कमजोर है। अगले दो दिन में यह सुधर सकती है। वेंटिलेशन सूचकांक जितना बेहतर होगा प्रदूषण कण उतनी तेजी से बिखरेंगे। 6 हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से अधिक का वेंटिलेशन सूचकांक ही प्रदूषण कणों को बिखरने में सक्षम होता है। यह 4 हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से भी नीचे रिकॉर्ड किया गया था।