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मुहिमः 2023 तक चेचक और खसरा के खात्मे का लक्ष्य 

Fri, 06 Sep 2019 10:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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डेमो - फोटो : डेमो
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वर्ष 2023 तक चेचक और खसरा को खत्म करने का लक्ष्य लेकर दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों ने एकसाथ काम करने का फैसला लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को हुए सम्मेलन में यह करार किया गया। 

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डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि इस फैसले से चेचक (मीजल्स) और खसरा (रूबेला) के खात्मे के लिए किए जा रहे प्रयासों कों बल मिलेगा। यह करार एक अत्यधिक संवेदनशील प्रयोगशाला से सहयोग प्राप्त, मामले पर आधारित निरीक्षण प्रणाली, उपयुक्त योजना और प्रतिक्रिया के लिये बेहतर प्रमाण का आह्वान करता है। 

चेचक खासतौर पर गरीबों के लिए खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह कुपोषित और कम प्रतिरोधकता वाले बच्चों पर हमला करता है। इससे पीड़ित को गंभीर जटिलताएं जैसे दृष्टिहीनता, एंसेफलाइटिस, तीव्र डायरिया, कान में संक्रमण और निमोनिया आदि हो सकती हैं। 
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सभी 11 सदस्य देशों में बच्चों के लिए मीजल्स कंटेनिंग वैक्सीन (एमसीवी) के दो डोजेज की उपलब्धता है जबकि रूबेला-कंटेनिंग वैक्सीन 10 देशों के पास उपलब्ध है। साल 2014 से 2017 के बीच चेचक से होने वाली मौतों में करीब 23 फीसदी की कमी आई है। इसके लिए टीकाकरण को अहम माना जा रहा है। इस क्षेत्र में जनवरी 2017 से  मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीके करीब 366 मिलियन बच्चों तक पहुंच चुके हैं। 

डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने बताया कि चेचक के खत्म होने से इन देशों में प्रतिवर्ष पांच लाख लोगों की जान बचेगी। वहीं खसरा के अंत से लगभग 55 हजार मामलों में राहत मिलेगी और गर्भवती महिलाओं और शिशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा। 

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