फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस साल कोरोना बना रोड़ा, चार वर्षों में सबसे कम टीबी रोगियों की हो पाई पहचान

Sun, 27 Dec 2020 02:55 PM IST
प्राची प्रियम परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

- वर्ष 2017 से लेकर अब तक पहली बार 60 फीसदी तक लक्ष्य नहीं हो सका पूरा
- लॉकडाउन की वजह से टीबी मरीजों के इलाज पर पड़ा बुरा असर
- कोरोना से चार गुना अधिक जानलेवा है टीबी संक्रमण
- रोजाना देश में 1200 से ज्यादा लोगों की हो रही मौत, हर दिन साढ़े सात हजार मिल रहे रोगी
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार के आरा जिला निवासी 32 वर्षीय सुनीता कुमारी ने टीबी संक्रमण की वजह से कुछ ही दिन पहले दिल्ली एम्स में दम तोड़ दिया। महिला पिछले एक साल से मल्टीड्रग-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित थी। वह टीबी का उपचार ले रही थी लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन लगने के चलते उसका उपचार बीच में ही रुक गया। हालत खराब होने पर इसी महीने महिला को दिल्ली एम्स में भर्ती किया था लेकिन यहां हालत लगातार बिगड़ती चली गई और महिला मरीज ने दम तोड़ दिया। 
विज्ञापन


सुनीता कुमारी की ही तरह पश्चिम दिल्ली निवासी 28 वर्षीय विकास वर्मा की कुछ दिन पहले दिल्ली के डीडीयू अस्पताल में मौत हुई है। विकास भी लंबे समय से टीबी संक्रमण से जूझ रहे थे। देश की राजधानी में ऐसी कई घटनाएं हैं जिनमें कोरोना संक्रमण के चलते स्वास्थ्य सेवाओं में दिक्कतें आने से अपनी जान गंवानी पड़ी। 

देश को टीबी संक्रमण से मुक्त कराने के लिए कोरोना वायरस एक बड़ा रोड़ा बना है। चार साल में पहली बार कोरोना वायरस की वजह से देश भर में सबसे कम टीबी रोगियों की पहचान हुई है। इस साल 56 फीसदी मरीजों की पहचान विभिन्न राज्यों में हुई है। जबकि वर्ष 2017 से लेकर 2019 के बीच सालाना 60 फीसदी से अधिक टीबी मरीजों की पहचान हुई थी। 
विज्ञापन


निक्षय रिपोर्ट के अनुसार इस साल एक जनवरी से लेकर 20 दिसंबर तक देश में 16,91,996 टीबी ग्रस्त मरीजों की पहचान हुई है जिनमें से 5,13,846 मरीजों की जानकारी प्राइवेट अस्पतालों से मिली। इस साल 29.99 लाख टीबी रोगियों की पहचान करने का सरकार ने लक्ष्य रखा था लेकिन अभी तक 56 फीसदी ही यह पूरा हो पाया है। जबकि इससे पहले वर्ष 2019 में 84, 2018 में 73 और साल 2017 में 75 फीसदी लक्ष्य पूरा किया गया था।

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी राज्यों से कहा था कि देश पिछले 11 महीने से महामारी के खिलाफ निरंतर जंग लड़ रहा है। अब जब कोविड के काम को प्राथमिकता दी जा रही है, हमें 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। टीबी संक्रमण की गंभीरता को लेकर उन्होंने यहां तक कहा कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। 

 

नहीं मिला बेड, इलाज में हुई देरी

मृतक विकास के भाई सुमित वर्मा बताते हैं कि जब विकास की तबियत बिगड़ी थी तो वह तीन अस्पतालों में बिस्तरों के लिए चक्कर लगाते रहे, लेकिन कहीं भी उनके भाई को भर्ती नहीं किया गया। कोरोना वायरस के चलते सभी अस्पतालों में बिस्तर भरे थे। यहां तक कि अपोलो और मैक्स अस्पताल ने भी उनके भाई को भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया था। 

दोनों ही अस्पतालों ने आईसीयू में जगह न होने का हवाला दिया था। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस पर ध्यान देने की वजह से टीबी की निगरानी, जांच और उपचार पर काफी गंभीर असर पड़ा है। इससे एक वैकल्पिक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट भी पैदा हुआ है। 

रोजाना कोरोना से ज्यादा मौतें टीबी संक्रमण से
पथ संगठन के वैश्विक तकनीकी टीबी निदेशक शिबू विजयन का कहना है कि गैर कोविड स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी बुरा असर पड़ा है। जबकि हकीकत यह है कि कोरोना वायरस की तुलना में टीबी रोग चार गुना अधिक खतरनाक है। आज भी देश में हर दिन 1200 लोगों की इस संक्रमण के चलते मौत हो रही है। 

जबकि रोजाना साढ़े सात हजार टीबी संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ अनंत भान का कहना है कि महामारी के चलते गैर कोविड मरीजों को काफी परेशानियों को सामना करना पड़ा है। बच्चों का टीकाकरण, मातृत्व सुरक्षा और टीबी संक्रमण जैसे गंभीर विषयों पर भारत को काफी नुकसान हुआ है।

 
विज्ञापन

शुरुआती छह माह में पांच लाख मिसिंग केस

आंकड़ों पर गौर करें तो इसी साल के शुरुआती छह माह में करीब पांच लाख टीबी मरीजों की पहचान नहीं हो पाई है। जबकि 42 फीसदी टीबी मरीजों को सरकार से मिलने वाली पोषण राशि भी नहीं मिल सकी। 

दिल्ली एम्स के वरिष्ठ पल्मोनरी विशेषज्ञ डॉ. करण मदान का कहना है कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2018 में मामलों का पता लगाने में 18 फीसदी और 2019 में 12 फीसदी वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि जहां देश साल 2025 तक टीबी से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में कोविड की वजह से आई रुकावट ने गंभीर चुनौती खड़ी की है। 

शुरुआती छह माह की स्थिति
 
माह नए टीबी केस कमी/बढ़ोत्तरी
जनवरी 196603 0.2 फीसदी बढ़ोत्तरी
फरवरी 212811 10 फीसदी बढ़ोत्तरी
मार्च 167182 21 फीसदी कमी
अप्रैल 81878 63 फीसदी कमी
मई 117459 47 फीसदी कमी
जून 150366 26 फीसदी कमी


*(केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सेंट्रल टीबी डिवीजन के अनुसार)
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें